राष्ट्रहित सर्वोपरि —आर के पाण्डेय एडवोकेट

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कमजोर टिकैत से मजबूती की उम्मीद में विपक्ष
—ढुलमुल रवैये से भ्रमित सत्ता।
—इंदिरा जैसी कठोरतम रणनीति आवश्यक।
—किसान-जवान हितैषी स्वयं लोभ का त्याग करें।

पर्दाफाश न्यूज।
प्रयागराज। न संविधान की मर्यादा बची न ही विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका की बल्कि प्रलोभन के जिद्द ने देश को ही दांव पर लगा दिया है जिसमें देश विरोधी ताकतों को पहचानने में सत्ता व विपक्ष दोनों नाकामयाब हैं।
उपरोक्त तथ्य आज मीडिया के सम्मुख रखते हुए वरिष्ठ समाजसेवी आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि आजाद भारत का सबसे काला दिन 26 जनवरी 2021 था जबकि दहशतगर्दों द्वारा दिल्ली दंगा के साथ लाल किला पर कब्जा करके लूट-पाट करते हुए राष्ट्रीय ध्वज तिरँगा का घोर अपमान किया गया। लेकिन इससे बड़ा दुःखद पहलू यह है कि सरकार ने इन देश विरोधी ताकतों के विरुद्ध सीधी कार्यवाही के बजाय ढुलमुल रवैया अपना रखा है जबकि समस्त प्रकरण का सीधा जवाबदेह तथाकथित किसान व कमजोर नेता राकेश टिकैत अपने घड़ियाली आंसू के सहारे विपक्ष को मजबूती के सपने दिखा रहा है। वास्तव में सच तो यह है कि भारतीय संविधान, विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका की घोर उपेक्षा करके कुछ देश विरोधी ताकतों ने एक ऐसे आंदोलन को हवा दे रखी है जोकि सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करके देश की राजधानी को बंधक बना रखा है तथा गणतंत्र दिवस पर लाल किला पर हमला करके बहुत बड़े खतरे का इशारा कर दिया है लेकिन सत्तापक्ष तथा विपक्ष इस हकीकत को समझने के बजाय अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं। जबकि यह तथाकथित आंदोलन स्वयं को देशविरोधी ताकतों का कठपुतली साबित कर चुका है तो आज भारत सरकार को पूर्व पीएम इंदिरा जी जैसी मजबूत इरादे की कठोरतम कार्यवाही के साथ दिल्ली दंगे के आरोपियों को कड़ी सजा देने की जरूरत है। हमे स्मरण रहना चाहिए कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है। देश के सुरक्षित रहने पर ही राजनीति, खेती, नौकरी व व्यवसाय सुरक्षित रहेंगे। विपक्ष को सीधी चेतावनी देने हुए पीडब्ल्यूएस प्रमुख आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि यदि विपक्ष खुद को किसान-जवान हितैषी मानता है तो वर्तमान तीनो किसान सुधार बिल के सापेक्ष वह वर्ष 2014 के पूर्व अपनी सत्ता के दौरान किये गए कृषि सुधारों, किसानों की दशा पर श्वेत पत्र जारी करते हुए वर्तमान किसान सुधार बिल में उपलब्ध कमियों को जनता के समक्ष लिखित में प्रस्तुत करते हुए यह भी स्पष्ट करे कि उसने किसान हित मे स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू क्यों नहीं किया? आर के पाण्डेय ने विपक्ष को यह भी चैलेंज दिया कि यदि वह वास्तव में किसान-जवान का हित चिंतक है तो आगामी चुनावों में 100% सीट पर केवल गैर राजनीतिक छोटे असली किसान व सेना के रिटायर्ड जवानों व राज्य पुलिस के जवानों को चुनाव लड़ाए व उन्हें ही 100% मंत्री पद पर आसीन करते हुए देश के सभी आयोग के शीर्ष पद पर आसीन करने की घोषणा करे अन्यथा यह माना जायेगा कि विपक्ष भी अब दहशतगर्द देश विरोधी ताकतों के हाथों में खेल रहा है।
बता दें कि आर के पाण्डेय एडवोकेट अपने संगठन पीडब्ल्यूएस परिवार के जरिये भ्रष्टाचारमुक्त भारत व राष्ट्रहित में सामाजिक कार्य अभियान के साथ बेसहारा परिवारों के सहायतार्थ व उनके बच्चों को निःशुल्क उत्तम शिक्षा हेतु मात्र 01ईंट 01रु. के जन सहयोग से देवालय व शिक्षालय निर्माण का महाक्रान्तिकारी महाअभियान चला रहे हैं तथा राष्ट्रहित में भारतीय नागरिकों को जागरूक करने की मुहिम चलाते रहते हैं।

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