आबकारी विभाग की जनपद स्तरीय टीम द्वारा हुआ मनरेगा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण, स्थलीय जाँच तक डटे वादी व प्रतिवादी, आरोप प्रत्यारोप के बीच जैसे तैसे पूरी हुई जाँच

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● जिला आबकारी अधिकारी ने स्थलीय जांचोपरांत नही दिया कोई बयान, ऐसे में डीएम साहब के रिपोर्ट का है सभी को इंतजार

● जाँच के दौरान वादी प्रतिवादी में हुई नोकझोक, आबकारी अधिकारी व ग्रामीण की पहल पर बनी रही शांति व्यवस्था

● 12 परियोजनाओं का हुआ भौतिक सत्यापन

पर्दाफ़ाश न्यूज़ टीम
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

शुक्रवार को बढ़नी ब्लॉक के ग्राम पंचायत बसहिया में शिकायतकर्ता ज्योतिराम पुत्र झिनक निवासी रामगढ़वा (बसहिया) की शिकायत का संज्ञान लेते हुये जिला आबकारी अधिकारी/नोडल अधिकारी रविन्द्र प्रताप सिंह व उनकी टीम ने मनरेगा सहित अन्य विकास कार्यों की भौतिक रूप से जाँच की।

जाँच के दौरान कुल 12 परियोजनाओं का भौतिक सत्यापन किया गया। जिसमें परियोजना वार जांच की गई। विदित हो कि ग्राम पंचायत बसहिया में रामगढ़वा, लक्ष्मी नगर, नौडिहवा भी टोले के रूप में दर्ज है, इसलिए जांच अधिकारी को काफी भाग दौड़ करनी पड़ी। जानकारी के अनुसार शिकायत कर्ता द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-202020-21 में कराए गए 12 परियोजना के जाँच के लिए जिलाधिकारी को शपथपत्र के साथ शिकायत भेजी थी, जिसकी पूर्व निर्धारित तिथि 7 दिसम्बर तय की गई थी। तय तिथि पर जाँच न होने के कारण 18 दिसम्बर की तिथि नियत की गई।

जाँच के दौरान लक्ष्मी नगर की महिलाओं ने लॉक-डाउन में किये कार्य का भुगतान नही मिलने का मुद्दा भी उठाया था, अलग अलग महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि 45, 12, 30, 15 दिन कार्य करने के बाद भी भुगतान नही मिला, ज़िस पर ग्राम पंचायत अधिकारी ने कहा कि परियोजना स्थल पर पानी भरने की वजह से कार्य का एमबी नही हुआ इसलिए भुगतान नही मिला है। इसके साथ ही लोगों ने जाँच अधिकारी के सामने अपनी बात रखी।

जांच के दौरान वादी और प्रतिवादी के बीच जांच अधिकारी/नोडल अधिकारी जिला आबकारी अधिकारी के सामने ही, कार्य योजना (प्लान प्लस) और हुऎ कार्य  को भी लेकर भी खींचतान हुई। जैसे तैसे जाँच अधिकारी ने डॉट डपट कर जाँच पूरी की।   शिकायत कर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ बिंदुओं पर कार्य शिक़ायत करने के बाद की गई है,जो जाँच के घेरे में आता है। इस दौरान जाँच अधिकारी जिला आबकारी अधिकारी ने किसी तरह का बयान नही दिया उन्होंने कहा जाँच ऊपर के अधिकारियों को सौंपी जाएँगी, निर्णय लेने का अधिकार उन्ही को है।

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