डीएम दीपक मीणा द्वारा जिला स्तरीय सलाहकार समिति की मीटिंग के दौरान संभाव्यतायुक्त ऋण योजना 2021-22 का अनुमोदन व विमोचन, अगले वित्त वर्ष किसानों व कारोबारियों को मिलने वाले रु 3455.60 करोड़ का ऋण का हुआ आकलन

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एम एस खान की रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा तैयार किए गए जिले की संभाव्यतायुक्त ऋण योजना 2021-22 का अनुमोदन व विमोचन दिनांक 25 नवम्बर 2020 को जिला अधिकारी सिद्धार्थनगर दीपक मीणा द्वारा जिला स्तरीय सलाहकार समिति की मीटिंग के दौरान किया गया। सिद्धार्थनगर जनपद के लिए आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल रुपये 345560.50 लाख की बैंक ऋण सम्भाव्यता का आकलन किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि 2021-22 की  जिला ऋण योजना सम्भाव्यक्तायुक्त्त ऋण योजना (पीएलपी) 2021-22 के आधार पर तैयार की जाएगी, जिससे जिले के किसानों व निवेशकों को चालू वित्त वर्ष की तुलना में 4.20% अधिक ऋण मिलने की संभावना है। उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास में नाबार्ड के योगदान की प्रशंसा करते हुए बैंकों को निर्देश दिये कि वह नाबार्ड द्वारा आंकलित ऋण सम्भावनाओं के अनुसार ही अपने वित्तीय व भौतिक लक्ष्य तय करें जिससे किसानों की तय अवधि में आय वृद्धि के लक्ष्य को हासिल करने में सुगमता हो।  जिला विकास प्रबन्धक, नाबार्ड, अरुण कुमार ने बताया कि सम्भाव्यक्ता युक्त्त ऋण योजना (पीएलपी) एक ऐसा दस्तावेज है, जो प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में उपलब्ध सम्भवयताओं का बैंक ऋण के माध्यम से दोहन को रेखांकित करता है।उन्होंने बताया कि पीएलपी बनाते समय भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों के साथ साथ राज्य तथा केंद्र सरकार की लोक कल्याण कारी योजनाओं तथा स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया है। कृषि के क्षेत्र में तेजी से हो रहे परिवर्तनों।  एवं नई तकनीक के उपयोग के जरूरत को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2021-22 की पीएलपी की थीम “किसान की आय में वृद्धि के लिए कृषि उत्पादों का समूहन” रखी गई है। 2022 तक किसान की आय को दुगनी करने के महत्व को समझते हुए जिला में कृषि गतिविधियों के अन्तर्गत फसली ऋण हेतु रुपये 209700.15 लाख तथा कृषि और सम्बंधित गतिविधियों के लिए रुपये 66695.55 लाख के सावधि ऋण का आकलन किया गया है।इसके अतिरिक्त कृषि सम्बन्धी आधारभूत संरचना के लिए रुपये 7248.50 लाख, कृषि अनुषंगी गतिविधियों हेतु रुपये 3536.25 लाख, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्दम क्षेत्र के लिए रुपये 45008.00 लाख, निर्यात, शिक्षा व आवासन के लिए रुपये 6552.00 लाख, सोशल इन्सफ्राटेक्चर के लिए रुपये 424.80 लाख नवीकरणीय ऊर्जा के लिए रुपये 276.75 लाख तथा अनौपचारिक ऋण वितरण प्रणाली (एसएचजी, जेएलजी, पीएमजेडीवाई इत्यदि) के लिए रुपये 6118.50 लाख के बैंक ऋण की सम्भाव्यता का आकलन किया गया है। अग्रणी जिला प्रबन्धक ओ पी अग्रहरि ने अस्वासन दिया कि जनपद की ऋण योजना तैयार करते समय बैकों के लक्ष्य नाबार्ड द्वारा तैयार पीएलपी में आंकलित ऋण सम्भवयताओं के अनुरूप ही तय किये जाएँगे।

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