बाल विकास परियोजना में कुपोषितों के पुष्टाहार के आसमान वितरण का तमाशा

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कुपोषितों के पुष्टाहार को अधिकारी खुद का मन बैठे आहार
—बाल विकास परियोजना का मामला।
—लाभार्थियों के सापेक्ष कम मिल रहा पुष्टाहार।
—आसमान वितरण पर सुपरवाइजर ने कार्यवाही का दिया भरोसा।

पर्दाफाश न्यूज टीम।
विक्रमजोत, बस्ती, 13 नवम्बर 2020। सरकार की हजारों यत्न को धता बताकर बाल विकास परियोजना के अधिकारी सुधरने का नाम नही ले रहे जिससे कुपोषितों की संख्या भी बरकरार है क्योंकि इन कुपोषितों का आहार तो अधिकारी गटकने में लगे हैं।
जानकारी के अनुसार जब विक्रमजोत के विभिन्न आँगनबाड़ी केंद्रों के ड्राई राशन वितरण व्यवस्था को संवाददाता ने देखा तो बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। गोपनीयता की शर्त पर कई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने बताया कि उनके यहां उपलब्ध 07 माह-03 वर्ष, 03 वर्ष-06 वर्ष, गर्भवती, धात्री, किशोरी व लाल-पीले बच्चों की उपलब्ध पंजीकृत संख्या के सापेक्ष काफी कम मात्रा में ड्राई राशन मिलता है जिससे सभी लाभार्थियों को उसका वितरण नही हो पाता। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने बताया कि उनके सीडीपीओ व सुपरवाइजर मनमाने तरीके से ड्राई राशन व पुष्टाहार उपलब्ध कराते हैं जिससे तमाम केंद्रों को जरूरत से अधिक लाभ मिलता है जबकि उनके केंद्र पर अधिक लाभार्थी के बावजूद बेहद कम सामग्री मिलती है।
बता दें कि बाल विकास परियोजना अधिकारी विक्रमजोत के कार्यक्षेत्र में आने वाले तमाम आंगनबाड़ी केंद्रों में आसमान वितरण की व्ययवस्था है। इस बावत सीडीपीओ कार्यालय ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया हालांकि एक सुपरवाइजर ने भरोसा दिलाया कि जिन केंद्रों पर अधिक सामग्री पहुंच गई है वहां के अतिरिक्त सामग्री को जरूरतमंद केंद्र पर बंटवाकर आसमान वितरण की समस्या खत्म की जाएगी। फिलहाल इस प्रकरण में समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने जनवरी 2020 से नवम्बर 2020 तक इस क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध व पंजीकृत लाभार्थियों के सापेक्ष वितरित ड्राई राशन का विवरण आरटीआई ऐक्ट 2005 के तहत मांगा है।

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