विश्वविद्यालयी व प्रतियोगी शिक्षा के बजाय नाबालिग बच्चों के शिक्षा का उतावलापन बन सकता है आत्मघाती कदम- अधिवक्ता आर के पाण्डेय

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● फीस का खेल जान से खिलवाड़।
● जिम्मेदारी के निर्वहन के बजाय पलायनवादी मानसिकता

पर्दाफ़ाश न्यूज़ टीम
नैनी, प्रयागराज

राज्य में विश्वविद्यालयी व प्रतियोगी शिक्षा के बजाय नाबालिग बच्चों के शिक्षा का उतावलापन किसी रहस्य से कम नही है क्योंकि वयस्क व बौद्धिक स्तर पर मजबूत विश्वविद्यालय व प्रतियोगी शिक्षा को अनलॉक करना अधिक जरूरी है।

जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के संकट के चलते अभी भी विश्वविद्यालयी व प्रतियोगी शिक्षा लॉक चल रहा है व इनके अनलॉक की कोई गाइड लाइन तक नही आयी है जबकि हाई स्कूल व इंटर के नाबालिग बच्चों/विद्यार्थियों को आगामी 19 अक्टूबर 2020 से विद्यालय में अध्ययन हेतु बुलाया जा रहा है। इस बावत वरिष्ठ समाजसेवी आर के पाण्डेय एडवोकेट ने आज मीडिया से वार्ता में कहा कि सरकार को सबसे पहले विश्वविद्यालय, डिग्री कालेज, तकनीकी संस्थान व प्रतियोगी कक्षाओं को खोलना चाहिए क्योंकि उनमें अध्ययनरत विद्यार्थी वयस्क व बौद्धिक स्तर पर अधिक परिपक्व होते हैं लेकिन हाई स्कूल व इंटर के नाबालिग बच्चों को स्कूल में बुलाना आत्मघाती कदम हो सकता है। आर के पाण्डेय के अनुसार यह सब वास्तव में बेहद बड़े स्तर का फीस का खेल है। इस बावत आर के पाण्डेय का तर्क है कि आरटीई ऐक्ट 2009 तथा सरकारी नियंत्रण के कारण प्राइमरी, जूनियर व विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा निःशुल्क है या बहुत ही कम शुल्क में प्राप्य है जबकि अधिकांश हाई स्कूल व इंटर कालेज प्राइवेट संस्थान हैं व ऊँचे कार्पोरेट घराने तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा बेहद ऊंची फीस के साथ चलाये जा रहे है जिनमे महज अधिकतम फीस वसूली के दृष्टिकोण से ही इन्हें खोला जा रहा है। उन्होंने इस व्यवस्था को पलायनवादी भी बताया जिसके पीछे तर्क है कि आखिर हर अभिभावक से अपने बच्चे को स्कूल भेजने की लिखित सहमति क्यों ली जा रही है जबकि विद्यालयों में दो बच्चों में 06 फीट की दूरी व कॉपी-किताब आदि का आदान-प्रदान वर्जित है तथा उपस्थिति भरनी भी जरूरी नही है तो आखिर विद्यालय व उनके स्टाफ की जरूरत ही क्या है? आर के पाण्डेय ने सरकार व प्रशासन से आग्रह किया है कि वह वस्तुस्थिति को समझते हुए सर्वप्रथम विश्वविद्यालय, डिग्री कालेज, तकनीकी संस्थान व प्रतियोगी शिक्षण को खोले जिससे बेहतर भविष्य व नौकरी का इंतजार कर रहे नवयुवकों का सपना जल्द साकार हो सके तथा छोटे व नाबालिग बच्चों को अभी और सुरक्षित रखा जा सके।

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