ऐतिहासिक रामलीला मंचन पर कोविड का लगा ग्रहण, आयोजन के लिए समिति के सदस्यों मे असमंजस, कलाकारों में निराशा, छोटे व्यवसायियों में आर्थिक नुकसान होने से चिंता

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• बढ़नी क्षेत्र के औदही कलां गांव में 200 वर्ष से होता रहा है रामलीला

निजामुद्दीन सिद्दीकी की रिपोर्ट
बढ़नी, सिद्धार्थनगर

कोरोना संक्रमण से ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक रामलीला मंचन पर ग्रहण लग सकता है। बढ़नी क्षेत्र के औदही कला गांव में 200 वर्षों से आयोजित होने रामलीला के आयोजक समिति के सदस्य कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में असमंजस में है। वहीं क्षेत्र के लोग रामलीला मंचन होने की आस में है।
औदही कलां गांव में रामलीला आयोजन करने के लिए श्रीरामलीला समिति के सदस्य ऊहापोह की स्थिति में हैं। श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष गंगाराम तिवारी बताते हैं कि रामलीला की शुरुआत गांव के ही लोगों ने साथ मिलकर की थी। शुरुआत से ही गांव के लोग ही इसमें अभिनय करते हैं। गांव के सभी कलाकार बिना सेवा शुल्क लिए काम करते थे। इसमें सहयोग करने वाले बाहरी कलाकारों को दान में मिलने वाली धनराशि से मेहनताना दिया जाता था। समिति के सदस्य अनुपम शुक्ल और शहंशाह आलम ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव एवं सुरक्षा नियमों के कारण मंचन को लेकर समिति में ऊहापोह की स्थिति है, तय नहीं हो पा रहा है कि आयोजन करें या न करें। समिति के सदस्य प्रदीप गुप्ता, रामकुमार, रामटहल, शिवपूजन विश्वकर्मा ने कहा कि रामलीला का आयोजन सांप्रदायिक प्रेम और सौहार्द को बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। शासन व प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का भी पालन करते हुए आयोजन करना होगा। सदस्य अतीकुर्रहमान, सुमेरु गिरि ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आस्था से जुड़े होने के कारण रामलीला मंचन के दौरान दर्शकों की तादाद पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा। इसलिए असमंजस बना हुआ है। एसडीएम शोहरतगढ़ अनिल कुमार ने शासन से मिले निर्देशों के तहत ही रामलीला आदि कार्यक्रमों के आयोजन की अनुमति दी जाएगी।

कारोबारियों के आय का जरिया है रामलीला- रामलीला मंचन तमाम छोटे व्यवसायियों की आय का जरिया भी है। इस वर्ष मंचन नहीं होने से टेंट, लाइट, पर्दा, हारमोनियम, ढोलक, ध्वनि विस्तारक व्यवसायियों के साथ चाय, मूंगफली, चाट व खोमचा वालों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

पात्रों में है निराशा- रामलीला में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाने वाले रामनरेश गौड़, रविकांत प्रजापति, रमेश गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, श्रवण तिवारी, विष्णु अग्रहरि, शिवम तिवारी, कौशल गुप्ता बताते हैं कि वे मंचन में भूमिका के लिए पूरा साल इंतजार करते हैं। इस बार कोरोना ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

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