हाई कोर्ट इलाहाबाद पर महिलाओं का अनवरत धरना 40 वें दिन भी जारी, धरनारत महिलाओं ने अपने एसओ, एसडीएम, डीएम आदि पर लगाया भ्रष्टाचार व दलाली का आरोप, जमीनी विवाद का है मामला

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● पीड़ित व अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास।
● पीडब्ल्यूएस की सक्रियता के बाद मामले में बड़ा खुलासा।

आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

प्रयागराज स्थित हाई कोर्ट इलाहाबाद के सामने बलिया की 03 महिलाओं का अनवरत धरना 40 वें दिन भी जारी रहा। वहीं पीडब्ल्यूएस परिवार की सक्रियता के बाद मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

जानकारी के अनुसार बलिया जनपद के बेल्थरा रोड तहसील के उभांव थानांतर्गत काकरासों गांव की दलित महिला मीना रानी अपनी दो वयस्क अविवाहित लड़कियों प्रिया व मंजू रानी के साथ हाई कोर्ट इलाहाबाद के सामने अम्बेडकर मूर्ति पर विगत 40 दिन से रात-दिन अनवरत धरना दे रही हैं। धरनारत महिलाओं ने अपने एसओ, एसडीएम, डीएम आदि पर भ्रष्टाचार व दलाली का आरोप लगाते हुए उनकी जमीन अवैध तरीके से कब्जा करा देने तथा कमिश्नर व सीएम द्वारा कार्यवाही न करने का आरोप लगा रही है व मुख्य न्यायाधीश हाई कोर्ट इलाहाबाद सहित तमाम उच्च अधिकारियों को शिकायते भेज रही हैं। इस संदर्भ में धरने के 37 वें दिन सामाजिक संस्था परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी (पीडब्ल्यूएस परिवार) के प्रबन्धक आर के पाण्डेय एडवोकेट सामने आकर धरनारत महिलाओं का पक्ष जाना व सम्बन्धित अधिकारियों से बात का प्रयास किया तथा जवाब न मिलने पर 38वें दिन भी बात किया लेकिन कोई जवाब न मिला तो संस्था के सदस्य महिलाओं की समस्या के न्यायोचित हल का प्रयास किये। इस दौरान इस संस्था के सदस्य बलिया जाकर जानकारी हासिल की व 39वें तथा 40वें दिन लगातार सम्बन्धित एसओ, एसडीएम तथा प्रयागराज के सिविल लाइंस एसओ से जानकारी प्राप्त की जिसके बाद बड़ा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

बता दें कि धरनारत महिलाओं द्वारा उनकी जमीन पर अवैध कब्जा व अधिकारियों पर भ्रष्टाचार तथा दलाली का आरोप लगाया जा रहा है जबकि अधिकारियों ने वार्ता में बताया है कि गीता रानी के पति ने अपने हिस्से से अधिक जमीन दूसरे व्यक्ति को बेच दी है तथा इसी मामले में तहसील में आपत्ति व दीवानी में वैनामा के कैंसिलेशन का मुकदमा दाखिल किया है जिसमे विपक्षी को नोटिस जारी हुआ है तथा खुद धरनारत महिलाओं के अनुसार क्रेता द्वारा दिया गया चेक बाउंस हो जाने के बाद क्रेता के विरुद्ध 138बी एनआई ऐक्ट का आपराधिक वाद भी दाखिल है जिसमे उसे वारंट जारी हुआ है। इन सबके बीच एक बड़ा रोचक तथ्य यह भी सामने आया है कि गीता रानी का पति व जमीन विक्रेता महेंद्र पाल अभी तक सामने नही आया है। इसी मामले में यह भी संज्ञान में आया है विवादित जमीन पर दो माह पहले हो रहे बाउंड्री निर्माण को तत्कालीन एसडीएम ने एसओ की उपस्थिति में रोक दिया था व यथास्थिति का आदेश जारी कर दिया है जबकि तहसीलदार के द्वारा उपलब्ध कराए गए हाई कोर्ट इलाहाबाद के एक आर्डर के अनुसार मई 2020 में ही हाई कोर्ट ने 21 जुलाई 2020 तक के लिए पक्षकारों को यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था। धरनारत महिलाओं ने अधिकारियों के कथन को अस्वीकार किया है जबकि अधिकारियों व महिलाओं के तरफ से दिखाए गए कागजात के अनुसार पूरा मामला जमीन के मालिकाना हक से अधिक का कार्य-विक्रय, अवैध कब्जा, चेक बाउंस व अदालतों में चल रहे दीवानी व आपराधिक मुकदमों का है। 40 दिन से चल रहे इस धरने के लिए प्रयागराज प्रशासन ने कोई अनुमति भी नही दी है। ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि हाई कोर्ट इलाहाबाद के सामने यह धरना 40 दिन से कैसे चल रहा है जबकि पूरा मामला मा० न्यायालय में विचाराधीन है तथा इस धरने की कोई अनुमति प्रयागराज प्रशासन ने नही दी है।

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