सांसद प्रतिनिधि सूर्यप्रकाश पाण्डेय की अगुवाई में मनाई गई गुरू गोविन्द सिंह जी की पुण्यतिथि, एबीवीपी के पूर्व प्रदेश सहमंत्री शिवशक्ति शर्मा समेत भाजपा कार्यकर्ताओं के किया याद

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पर्दाफ़ाश न्यूज़ टीम
शोहरतगढ, सिद्धार्थनगर

आज बलिदानी परम्परा में अद्वितीय सिक्खों के 10 वे गुरू गुरू गोविन्द सिंह की पूर्णतिथि पर उनके चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया गया । इस दौरान सांसद प्रतिनिधि सूर्यप्रकाश पाण्डेय ने संम्बोधित करतें हुए कहा कि गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। वे एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन 1699 में बैसाखी के दिन उन्होनें खालसा पन्थ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। गुरू गोबिन्द सिंह ने सिखों की पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया तथा उन्हें गुरु रूप में सुशोभित किया। उन्होंने मुगलों या उनके सहयोगियों (जैसे, शिवालिक पहाडियों के राजा) के साथ 14 युद्ध लड़े। धर्म के लिए समस्त परिवार का बलिदान उन्होंने किया, जिसके लिए उन्हें ‘सरबंसदानी’ (सर्ववंशदानी) भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त जनसाधारण में वे कलगीधर, दशमेश, बाजांवाले आदि कई नाम, उपनाम व उपाधियों से भी जाने जाते हैं।

इस दौरान एबीवीपी के पूर्व प्रदेश सहमंत्री शिवशक्ति शर्मा ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जहां विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे, उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की। वे भक्ति तथा शक्ति के अद्वितीय संगम थे। उन्होंने सदा प्रेम, एकता, भाईचारे का संदेश दिया। किसी ने गुरुजी का अहित करने की कोशिश भी की तो उन्होंने अपनी सहनशीलता, मधुरता, सौम्यता से उसे परास्त कर दिया। गुरुजी की मान्यता थी कि मनुष्य को किसी को डराना भी नहीं चाहिए और न किसी से डरना चाहिए। उनकी वाणी में मधुरता, सादगी, सौजन्यता एवं वैराग्य की भावना कूट-कूटकर भरी थी। उनके जीवन का प्रथम दर्शन ही था कि धर्म का मार्ग सत्य का मार्ग है और सत्य की सदैव विजय होती है।

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