300 किलोमीटर लंबा सफर तय करने के बाद भी नही पहुँचे अपने घर, थानाक्षेत्र की सड़क दुर्घटना में उड़ गए पखेरू

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मुस्तन शेरुल्लाह की विशेष रिपोर्ट
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

थानाक्षेत्र के ग्राम पंचायत लुचुइया के टोला नरौड़ा के निवासी जयप्रकाश मिश्र अपने पत्नी व बच्चों के साथ लंबे समय से लखनऊ में नौकरी कर निवास कर रहे हैं।

शुक्रवार को गांव पर रह रही बूढ़ी माता और और अन्य परिवारीजन की याद आई तो कोरोना संकटकाल में सुबह सवेरे उठकर मोटरसाइकिल से ही जय प्रकाश मिश्र अपनी पत्नी कमला देवी (50 वर्ष) के साथ गांव के लिए निकल पड़े। बड़ा लड़का सुनील (32वर्ष) व पुत्री सीमा (24वर्ष) और छोटे पुत्र बच्चा मिश्र (20 वर्ष) को घर पर छोड़ कर निकले दंपत्ति ने कहा कि कुछ दिन के लिए गांव जा रहा हूं आप लोग यहां अपना देखभाल व ख्याल रखिएगा। कोरोना संकटकाल में तीन सौ किलोमीटर लम्बी दूरी का सफर तय करते हुए गांव से कुछ ही पहले शोहरतगढ़ महथा के पास सड़क हादसे में एक मोटरसाइकिल की जोरदार ठोकर लग जाने से साथ में आ रही अर्धांगनी (50 वर्ष) की मौके पर मौत हो गई। हादसे को आंखों के सामने देखकर साथ में चल रहे पति जय प्रकाश मिश्र बेशुद्ध हो गए। लोगों ने घायल महिला को शोहरतगढ़ अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां उनकी मौत हो चुकी थी।

जयप्रकाश मिश्र का नरोड़ा गांव में चार भाइयों के साथ एक बड़ा परिवार रह रहा है। भाइयों में सबसे बड़े होने के नाते दूर रहकर भी कभी कभार समय निकालकर गांव पहुंचकर परिवार वालों के साथ उठना बैठना,खेती बाड़ी का काम देखना और गांव पर रह रही माता के देखरेख और उनके दर दवा व हर चीज की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी का निर्वहन भी करते रहते।

बहू कमला देवी अपनी सासू मां गीता (75 वर्ष ) से एक दिन पहले बातचीत कर घर आने की बात कही। सासु मां भी बहू के अलावा पुत्र के घर आने की सूचना को लेकर खुश थी , लेकिन उन्हें यह भी नहीं पता था कि घर की चौखट पर पहुंचने से पहले वह हमेशा के लिए इस संसार और परिवार को छोड़कर रास्ते में ही अलविदा कह देंगी।घटना सुनकर बूढ़ी माता गीता अन्य परिवारीजन के साथ शुक्रवारदेर शाम थाने पर बड़ी बहू का शव से लिपटकर चिल्ला चिल्ला कर यही कह रही थी कि हे भगवान ये क्या हो गया। लखनऊ में ठहरे बच्चों को माँ के मौत की सूचना मिलने पर उनके हाथ पांव फूल गए। रो रो कर सबका बुरा हाल रहा। पति जय प्रकाश मिश्र को अर्धांगिनी का रास्ते में ही जीवन साथ छोड़ कर चले जाने का अपार दुख सता रहा है तो वहीं पर गांव रिश्तेदार व क्षेत्र के लोगों को भी अपार पीड़ा है। शनिवार शाम के समय पोस्टमार्टम के बाद शव के पहुंचने पर ग्राम प्रधान पवन मिश्र व अन्य रिश्तेदारों, सहयोगी लोगों ने उनका अंतिम संस्कार बानगंगा नदी पर कर दिया गया।

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