नई शिक्षा नीति के साथ समान शिक्षा व्यवस्था जरूरी

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नई शिक्षा नीति के साथ समान शिक्षा के नई सोच की आवश्यकता

पर्दाफाश न्यूज। नैनी, प्रयागराज, 01 अगस्त 2020। भारत में बहुप्रतीक्षित नई शिक्षा नीति लागू हो रही है लेकिन इसके व्यापक प्रभाव के लिए सरकार को समान शिक्षा के साथ नई सोच की भी आवश्यकता है।
मीडिया से आन लाइन वार्ता में उपरोक्त बातें करते हुए समाजसेवी आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि आज सीबीएसई, आईसीआई, मदरसा व स्टेट बोर्ड्स जैसे अनेकों बोर्ड एवं तमिल, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत आदि अनेकों माध्यमों व परिषदीय, कान्वेंट, मकतब, गुरुकुल जैसे दर्जनों विधाओं के चलते शिक्षा जगत में भारी असमानता है। राम व निषादराज गुह एवं कृष्ण व सुदामा जैसी जोड़िया अब एक विद्यालय में नही पाए जाते। सरकार की नई शिक्षा नीति तब तक कारगर नही होगी जब तक कि उसकी सोच न बदले। आज जरूरत है कि सभी बोर्ड्स, माध्यम व विधाओं को खत्म करके एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू किया जाए तथा अमीर-गरीब-मंत्री-संतरी सभी के बच्चे एक साथ अध्ययन करें तथा प्रत्येक नेता व अभिनेता, अधिकारी व कर्मचारी, किसान व सेना के जवान के बच्चे का सरकारी विद्यालय में पढ़ना अनिवार्य हो तथा कम से कम पांच साल तक पाठ्यक्रम में कोई बदलाव न हो। सरकार अपनी सोच में परिवर्तन करके व एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करके तथा सबको शिक्षा-निःशुल्क शिक्षा की नीति लागू करके ही नई शिक्षा नीति के व्यापक प्रभाव को लागू कर सकती है।

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