जेई-एईएस से छुटकारा पाने को जागरूकता बेहद जरूरी, विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान से जन समुदाय को घर-घर किया जा रहा जागरूक

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अरविन्द द्विवेदी की रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर

जिले में चल रहे संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत जन समुदाय को घर-घर जाकर जागरूक किया जा रहा है। इसमें लोगों को जेई-एईएस से बचने के उपाय आदि के बारे में जागरूक बताया जा रहा है। आशा बरसात के मौसम में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों से भी बचने को आगाह कर रही हैं। 

वेक्टरवार्न के नोडल अधिकारी डॉ. एके आजाद ने बताया कि पूर्वांचल में जेई-एईएस अभिशॉप बनी रही, लेकिन जागरूकता के चलते इस पर नकेल कसा गया है। दिमागी बुखार से होने वाली मौत के आकड़े बेहद कम हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के दिशा निर्देश पर 31 जुलाई तक जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाकर जन समुदाय को जागरूक किया जा रहा है। इसमें आशा के साथ समन्वय विभाग भी लगे हैं। इस जागरूकता अभियान में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया के लक्षण व बचाव के उपचार के बारे में बताया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी एके मिश्रा ने बताया कि अधिकतर बीमारियां बरसात के मौसम में प्रभावी होती हैं। इसमें लोग लापरवाही करके बीमारी के शिकार हो जाते हैं। बरसात के ही मौसम में मच्छर पानी में लार्वा छोड़ देते हैं इससे संक्रमण बढ़ने लगता है। मच्छरों का प्रकोप कम करने के लिए नगर पालिका व ग्राम पंचायतों के माध्यम से एंटी लार्वा का छिड़काव, मच्छरों के लिए निरोधात्मक कार्रवाई, जल जमाव न होने पाए इसके उपाय व साफ-सफाई कराया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीणों से घरों के आसपास पानी न इकट्ठा होने दें, घर में सफाई रखें, बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं, मच्छरों से बचाव, सादे पानी को उबालकर पीने के साथ ही बिना चिकित्सक के सलाह के किसी प्रकार की दवा का सेवन न करने की अपील की जा रही है। उन्होंने बताया कि बच्चों में होने वाले किसी बुखार को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

यह सावधानी जरूरी

मच्छरों से बचें, मच्छरदानी व  कीटनाशक का प्रयोग करें।

सोते समय पूरे आस्तीन की शर्ट व फुल पैंट जरूर पहनें।

सुअरों को घर से दूर रखें। इनके रहने वाले स्थान पर जाली लगवाएं।

इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी का प्रयोग करें। पानी हमेशा ढ़क कर रखें।

पक्के व सुरक्षित शौचालय का प्रयोग करें।

शौच के बाद व खाने के पहले साबुन से हाथ अवश्य धुलें।

नाखूनों को काटते रहें। लंबे नाखून भोजन बनाते व खाते समय प्रदूषित होता है।

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