क्या समय के साथ अश्लीलता में खो गये सावन के कजरी गीत?

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टाइगर बाबू की रिपोर्ट
चिल्हिया, सिद्धार्थनगर

गांवों में आजकल धान के रोपाई का समय चल रहा है खेतों की जुताई कीचड (लेवा) बनाने का कार्य जोरो पर है। ट्रेक्टर अभी तक तो रोड पर चलते हुए तेज आवाज मे भोजपुरी गाने बजाकर चलते देखे जाते थे। इन तेज आवाज के गानों की वजह से आये दिन सडकों पर दुर्घटनाएं आम थी पर इस समय ट्रेक्टर खेतों मे अधिक चल रहे हैं। इन ट्रेक्टरों मे तेज आवाज मे अश्लील भोजपुरी गाने धडल्ले से बज रहे हैं जैसे आजकल कुछ प्रसिद्ध अशलील गाने जो बेहयाई, बेशर्मी, अश्लीलता के सारे हद पार करते हैं।

पहले का समय था कजरी गीत सावन गीत से गांव के सीवान का अलग ही रौनक था इन मधुर गीतों के धुन को सुनने का एक अलग ही आनन्द था किसान पुरूष एवं महिलाएं इन गीतों को गाकर मनोरंजक माहौल बनाते थे और धान की रोपाई करते थे। लेकिन ये सावन के कजरी गीत अब इन भोजपुरी अश्लील गानों के बीच दब कर एकदम से खत्म हो गये हैं।

प्रसाशन को यह न दिखाई दे रहा न सुनाई दे रहा है इस पर सख्ती से कार्यवाही हो ट्रेक्टरों पर बाजें उतरवाये जाएं । ऐसा करने से तो कजरी गीत का ओ माहौल नही ला सकते पर सख्ती होने से अश्लीलता तो कम हो ही जायेगा साथ ही साथ दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है ।

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