कोटेदार द्वारा अधिवक्ता से 20-22 रुपये अधिक मूल्य लेने का कबूलनामा, शोहरतगढ़ निवासी युवक से पैरवी के दौरान हुआ ऑडियो वायरल, ऑडियो में अमर्यादित भाषा का हुआ प्रयोग, अधिवक्ता ने अधिक पैसा लेने की 1 दिन पूर्व की गई थी उच्च अधिकारियों से शिकायत

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सिद्धार्थनगर से पंकज चौबे की विशेष रिपोर्ट

जून माह में सिद्धार्थनगर जनपद से शोहरतगढ़ विकास खण्ड के गड़ाकुल कोटेदार (उचित दर विक्रेता) अल्ताफ को ग्राहक से अधिक मूल्य लेना महंगा पड़ गया। अधिवक्ता नगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने उच्च अधिकारियों से कोटेदार की कार्यशैली के जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जब स्थानीय कोटेदार स्थानीय अधिवक्ता को बेवकूफ समझते हैं तो वह आम जनता को क्या समझते होंगे? उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर तीन पोस्ट लगातार डाली साथ ही साथ साथ पूरे प्रकरण की शिकायत पंजीकृत डाक के माध्यम से भी की है। जिलापूर्ति अधिकारी सिद्धार्थनगर को संबोधित पोस्ट में उन्होंने लिखा कि, हमने आज तक कभी भी स्थानीय कोटे की दुकान से कोई भी राशन नहीं लिया लेकिन कुछ औपचारिक कागजों को बनवाने के लिए राशन कार्ड की जरूरत थी, इसलिए इस वर्ष हमने अपना राशन कार्ड बनवाया। लोगों ने बताया कि अगर आप राशन नहीं लेंगे तो फिर आपका राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा। इस अनुक्रम में हमने कस्बा शोहरतगढ़ के ग्राम गड़ाकुल के कोटेदार श्री अल्ताफ जी से नियमानुसार राशन की मांग की उन्होंने हमसे पूरी चतुराई वाली सज्जनता के साथ कहा कि हम सबसे ₹70 लेते हैं आप स्थानीय अधिवक्ता हैं आपसे ज्यादा क्या लें। कभी भी रात विरात जरूरत पड़ सकती है। आप अंगूठा लगाकर जाएं दूसरे दिन किसी को ₹70 लेकर भेज दीजिएगा। हम उसे राशन दे देंगे। इस वार्ता के समय हमारे साथ हमारे मुवक्किल रफीक भी मौजूद थे। दूसरे दिन हम कोर्ट के कार्यों से व्यस्त थे तो हमारे 1 मुवक्किल जिनका नाम शराफत है, वह आए हमने उनको ₹70 दिया और कहा कि हमारा राशन अल्ताफ की दुकान से लेकर आइए हमने शराफत जी को यह भी कहा था कि यदि हो सके तो कोटेदार से कहिएगा कि हमें चावल के बजाय गेहूं ही बढ़ाकर दे दे तो अल्ताफ कोटेदार जी ने हमारे मुवक्किल शराफत से ₹70 लिया और उन्हें 20 किलो गेहूं दिया। हमारे यहां आने वाले मुवक्किल रफीक जी ने बताया कि राशन की दुकान पर शराफत को चना भी मिलना चाहिए था और 20 किलो अगर गेहूं दिया है तो ₹40 ही हुआ शराफत से ₹70 क्यों लिया? हम भी थोड़ा असमंजस में पड़ गए फिर हमने गेहूं और चावल के संदर्भ में सरकारी रेट स्वयं जानने का प्रयास किया तो पता चला कि ₹2 किलो गेहूं है और ₹3 किलो चावल है। अब सवाल यह है कि अगर स्थानीय कोटेदार स्थानीय अधिवक्ता को बेवकूफ समझते हैं तो वह आम जनता को क्या समझते होंगे? आज सुबह से हम इसी विचार में लगे हुए हैं हमें समझ में नहीं आ रहा है कि स्थानीय कोटेदार आम पब्लिक को किस दर्जे का मूर्ख समझते हैं?

जिलापूर्ति अधिकारी को संबोधित प्रार्थना पत्र में उन्होंने लिखा कि हमने सोचा आप जिला पूर्ति अधिकारी हैं आपको जनपद के कोटेदारों के व्यवहार और कार्यशैली के बारे में पूरी जानकारी होगी तो क्यों ना जनहित में आप ही से पूछ लिया जाए की ऐसे कोटेदारों को किस-किस से शह प्राप्त है और वह स्थानीय प्रशासन को किस दर्जे का मूर्ख समझते हैं? जिस कारण वह आम पब्लिक से इस तरह का व्यवहार करते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने मा० केंद्रीय मंत्री खाद्य एवं रसद भारत सरकार नई दिल्ली को सम्बोधित पत्र में लिखा कि हमने कभी भी राशन की दुकान से राशन नहीं लिया लेकिन कतिपय कारणों से हमें स्थानीय कोटेदार के राशन लेना पड़ा। स्थानीय कोटेदार ने हमें ही गलत मूल्य में राशन पहुंचाया जिसकी स्थानीय स्तर पर शिकायत हमने जिला पूर्ति अधिकारी महोदय को तत्काल आज कर दी। लेकिन हमारे पास तमाम पत्रकारों का और आम जनता का यह कह कर फोन आने लगा कि सरकार किसी की भी हो गुड्डू भैया कोटेदार कुछ ना कुछ भ्रष्टाचार का तरीका निकाल लेते हैं। इसलिए ज्यादा कुछ नहीं होगा कोटेदार ₹10 – 20 हज़ार खर्च करेगा थोड़ा परेशान होगा और फिर भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएगा। वैसे तो हमने स्थानीय प्रशासन पर भरोसा करते हुए शिकायती प्रार्थना पत्र जनपद के जिला पूर्ति अधिकारी को भेजा है लेकिन चुकी आम जनता की धारणा और राय ने हमें थोड़ा संदेह में डाल दिया इसलिए सोचा कि समस्त वस्तुस्थिति से आपको भी अवगत कराते हैं। स्थानीय जिला पूर्ति अधिकारी को हमने अपनी पूरी समस्याओं को विस्तार से लिखकर कार्यवाही हेतु पत्र भेजा है जो संलग्न कर रहा हूं। आशा है आपको संलग्न पत्र में सारी समस्याओं का विस्तार और मेरे साथ घटी घटना का के समस्त तथ्य मिल जाएंगे।

इन दोनों शिकायती प्रार्थना पत्रों को पंजीकृत करने के बाद प्रश्नगत कोटेदार व उनके साथ के लोगों द्वारा अधिवक्ता नगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव से मुलाकाती दौर शुरू हो गया। चूंकि अधिवक्ता लाग लपेट पसंद नही करते इसलिए उसकी भी कहानी सोसल मीडिया पर वायरल कर दी, उन्होंने पुनः लिखा कि, ग्राम गड़ाकुल के कोटेदार श्री अल्ताफ जी द्वारा हमारे साथ जो व्यवहार किया गया उससे मैं काफी दुखी और हतप्रभ हो गया। हमने सोचा कि जब यह हमारे साथ ऐसा व्यवहार कर सकते हैं तो गांव के अन्य तमाम अनपढ़ और गरीब लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे इस सोच के कारण हमें सामाजिक रूप से कलम उठानी पड़ी।

इसके बाद शोहरतगढ़ निवासी एक युवक से पैरवी करते समय कोटेदार द्वारा अधिवक्ता से अधिक पैसा लेने का कबूलनामा का ऑडियो वायरल हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि हम पूरे भारत में भ्रष्टाचार पर लगाम नही लगा सकते लेकिन आसपास ऐसी व्यवस्था पर चुप भी नही बैठ सकते। इसके सख्त रवैये से कोटेदार ने इनसे उनसे मानमनौव्वल करानी शुरू कर दी। मानमनौव्वल की इसी कहानी में गड़ाकुल कोटेदार ने एक व्यक्ति से पैरवी करने की बात कही, जिसका ऑडियो फिर सोसल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो में कोटेदार अल्ताफ ने खुद स्वीकार किया कि मैंने अधिवक्ता से 20-22 रुपये बढ़ती ले लिए है। अब उन्होंने उसकी शिकायत डीएसओ, लखनऊ आदि जगह एप्लिकेशन डाले है बाऊ। कोटेदार ने शोहरतगढ़ निवासी युवक से मामले की पैरवी करने की बात कही। साथ ही साथ कोटेदार की अधिवक्ता के संदर्भ में अमर्यादित भाषा का ऑडियो वायरल हो गया।

जिला पूर्ति अधिकारी को संबोधित प्रार्थना पत्र पार्ट-1
जिला पूर्ति अधिकारी को संबोधित प्रार्थना पत्र पार्ट-2

केन्द्रीय मंत्री खाद्य एवं रसद विभाग को संबोधित प्रार्थना

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