गड़ाकुल कोटेदार को ग्राहक से अधिक मूल्य लेना पड़ा महंगा, अधिवक्ता नगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने उच्च अधिकारियों से कोटेदार की कार्यशैली के जांच की, की मांग, कहा जब स्थानीय कोटेदार स्थानीय अधिवक्ता को बेवकूफ समझते हैं तो वह आम जनता को क्या समझते होंगे? आखिर क्या निर्णय लेगी 51%प्रतिशत जनता, पढ़े पूरी कहानी, अधिवक्ता की जुबानी

0
2315

पर्दाफ़ाश न्यूज़ टीम
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

गड़ाकुल कोटेदार को ग्राहक से अधिक मूल्य लेना महंगा पड़ गया। अधिवक्ता नगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने उच्च अधिकारियों से कोटेदार की कार्यशैली के जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जब स्थानीय कोटेदार स्थानीय अधिवक्ता को बेवकूफ समझते हैं तो वह आम जनता को क्या समझते होंगे?

सिद्धार्थनगर जनपद के शोहरतगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत गड़ाकुल का है। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर तीन पोस्ट लगातार डाली साथ ही साथ पूरे प्रकरण की शिकायत पंजीकृत डाक के माध्यम से भी की है। जिलापूर्ति अधिकारी सिद्धार्थनगर को संबोधित पोस्ट में उन्होंने लिखा कि, हमने आज तक कभी भी स्थानीय कोटे की दुकान से कोई भी राशन नहीं लिया लेकिन कुछ औपचारिक कागजों को बनवाने के लिए राशन कार्ड की जरूरत थी, इसलिए इस वर्ष हमने अपना राशन कार्ड बनवाया। लोगों ने बताया कि अगर आप राशन नहीं लेंगे तो फिर आपका राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा। इस अनुक्रम में हमने कस्बा शोहरतगढ़ के ग्राम गड़ाकुल के कोटेदार श्री अल्ताफ जी से नियमानुसार राशन की मांग की उन्होंने हमसे पूरी चतुराई वाली सज्जनता के साथ कहा कि हम सबसे ₹70 लेते हैं आप स्थानीय अधिवक्ता हैं आपसे ज्यादा क्या लें। कभी भी रात विरात जरूरत पड़ सकती है। आप अंगूठा लगाकर जाएं दूसरे दिन किसी को ₹70 लेकर भेज दीजिएगा हम उसे राशन दे देंगे। इस वार्ता के समय हमारे साथ हमारे मुवक्किल रफीक भी मौजूद थे।

दूसरे दिन हम कोर्ट के कार्यों से व्यस्त थे तो हमारे 1 मुवक्किल जिनका नाम शराफत है वह आए हमने उनको ₹70 दिया और कहा कि हमारा राशन अल्ताफ की दुकान से लेकर आइए हमने शराफत जी को यह भी कहा था कि यदि हो सके तो कोटेदार से कहिएगा कि हमें चावल के बजाय गेहूं के साथ नियमानुसार चावल के बजाए गेहूं ही बढ़ाकर दे दे तो अल्ताफ कोटेदार जी ने हमारे मुवक्किल शराफत से ₹70 लिया और उन्हें 20 किलो गेहूं दिया।
हमारे यहां आने वाले मुवक्किल रफीक जी ने बताया कि राशन की दुकान पर शराफत को चना भी मिलना चाहिए था और 20 किलो अगर गेहूं दिया है तो ₹40 ही हुआ शराफत से ₹70 क्यों लिया? हम भी थोड़ा असमंजस में पड़ गए फिर हमने गेहूं और चावल के संदर्भ में सरकारी रेट स्वयं जानने का प्रयास किया तो पता चला कि ₹2 किलो गेहूं है और ₹3 किलो चावल है। अब सवाल यह है कि अगर स्थानीय कोटेदार स्थानीय अधिवक्ता को बेवकूफ समझते हैं तो वह आम जनता को क्या समझते होंगे? आज सुबह से हम इसी विचार में लगे हुए हैं हमें समझ में नहीं आ रहा है कि स्थानीय कोटेदार आम पब्लिक को किस दर्जे का मूर्ख समझते हैं? हमने सोचा आप जिला पूर्ति अधिकारी हैं आपको जनपद के कोटेदारों के व्यवहार और कार्यशैली के बारे में पूरी जानकारी होगी तो क्यों ना जनहित में आप ही से पूछ लिया जाए की ऐसे कोटेदारों को किस-किस से शह प्राप्त है और वह स्थानीय प्रशासन को किस दर्जे का मूर्ख समझते हैं? जिस कारण वह आम पब्लिक से इस तरह का व्यवहार करते हैं। अब अगर आप हमारी शिकायत पर कोई कार्यवाही करेंगे तो स्थानीय कोटेदार अल्ताफ जी अपने कई शुभचिंतकों का कागज पर अंगूठा लगवा कर आपको यह बताने की कोशिश करेंगे कि वे पूरी ईमानदारी के साथ आम पब्लिक में राशन का वितरण कर रहे हैं और वह हम पर यह भी आरोप लगा सकते हैं कि हम अधिवक्ता होने के कारण ज्यादा राशन मांगने का दबाव बना रहे थे क्योंकि हमने नहीं दिया इसलिए उन्होंने शिकायत कर दी। तो आपकी जानकारी के लिए आपको बताता चलूं कि जीवन में हमने कभी भी राशन की दुकान से कोई राशन नहीं लिया है यह पहली बार का मामला था और अगर राशन कार्ड निरस्त हो जाने की समस्या ना होती तो शायद हम वहां से राशन लेते भी नहीं। मुख्य बात यह होती है की गरीब जनता सोचती है कि कोटेदार से कौन लड़े जो मिल रहा है उसमे भी यह दौड़ना शुरू करेगा
तो चलो जो कह रहा है उतना मान लिया जाए। लेकिन क्योंकि यह मामला हमसे खुद जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने गड़ाकुल के कोटेदार की कार्यशैली की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने की बात कही है।

इसके साथ ही उन्होंने मा० केंद्रीय मंत्री खाद्य एवं रसद भारत सरकार नई दिल्ली को सम्बोधित पत्र में लिखा कि, हम स्वयं कस्बा व तहसील शोहरतगढ़ जनपद सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। और स्थानीय जनपद में मुख्यता फौजदारी की वकालत करते हैं l कभी भी राशन की दुकान से राशन नहीं लिया लेकिन कतिपय कारणों से हमें स्थानीय कोटेदार के राशन लेना पड़ा। स्थानीय कोटेदार ने हमें ही गलत मूल्य में राशन पहुंचाया जिसकी स्थानीय स्तर पर शिकायत हमने जिला पूर्ति अधिकारी महोदय को तत्काल आज कर दी। लेकिन हमारे पास तमाम पत्रकारों का और आम जनता का यह कह कर फोन आने लगा कि सरकार किसी की भी हो गुड्डू भैया कोटेदार कुछ ना कुछ भ्रष्टाचार का तरीका निकाल लेते हैं। इसलिए ज्यादा कुछ नहीं होगा कोटेदार ₹10 – 20हज़ार खर्च करेगा थोड़ा परेशान होगा और फिर भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएगा। वैसे तो हमने स्थानीय प्रशासन पर भरोसा करते हुए शिकायती प्रार्थना पत्र जनपद के जिला पूर्ति अधिकारी को भेजा है लेकिन चुकी आम जनता की धारणा और राय ने हमें थोड़ा संदेह में डाल दिया इसलिए सोचा कि समस्त वस्तुस्थिति से आपको भी अवगत कराते हैं। स्थानीय जिला पूर्ति अधिकारी को हमने अपनी पूरी समस्याओं को विस्तार से लिखकर कार्यवाही हेतु पत्र भेजा है जो संलग्न कर रहा हूं। आशा है आपको संलग्न पत्र में सारी समस्याओं का विस्तार और मेरे साथ घटी घटना का के समस्त तथ्य मिल जाएंगे।

इन दोनों शिकायती प्रार्थना पत्रों को पंजीकृत करने के बाद प्रश्नगत कोटेदार व उनके साथ के लोगों द्वारा अधिवक्ता नगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव से मुलाकाती दौर शुरू हो गया। चूंकि अधिवक्ता लाग लपेट पसंद नही करते इसलिए उसकी भी कहानी सोसल मीडिया पर वायरल कर दी, उन्होंने पुनः लिखा कि, ग्राम गड़ाकुल के कोटेदार श्री अल्ताफ जी द्वारा हमारे साथ जो व्यवहार किया गया उससे मैं काफी दुखी और हतप्रभ हो गया। हमने सोचा कि जब यह हमारे साथ ऐसा व्यवहार कर सकते हैं तो गांव के अन्य तमाम अनपढ़ और गरीब लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे इस सोच के कारण हमें सामाजिक रूप से कलम उठानी पड़ी।

आज सुबह से श्री अल्ताफ जी अपने साथ पिंटू भाई को लेकर दो बार हमारे घर आ चुके हैं और दोनों ही बार उन्होंने हमसे यह प्रार्थना की, कि पहली बार क्षमा कर दिया जाए हम अपनी गलती स्वीकार करते हैं और जब संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच किया जाए या बयान लिया जाए तो हम उनको कुछ ऐसा बयान दें जिससे कि मामले का पटाक्षेप हो सके मामला समाप्त हो सके।।हमने उन्हें उत्तर दिया कि हमारा आपका कोई झगड़ा नहीं है निजी विरोध नहीं है निजी वैमनष्यता नहीं है निजी दुश्मनी नहीं है। अगर आपकी कोई किराने की दुकान होती और आपने हमसे ज्यादा पैसा लेकर हमें ठगा होता तो हम आपको निजी तौर पर माफ कर देते हैं। लेकिन आप स्थानीय ग्राम के कोटेदार हैं बहुत से गरीब और अनपढ़ लोग आप से राशन लेते होंगे। आप का जब यह व्यवहार हमारे साथ रहा है तो अन्य के साथ कैसा रहता होगा यह हमें थोड़ा बहुत आभास हो गया है। क्योंकि हमने सोशल मीडिया के माध्यम से भी शिकायत भेजी और पंजीकृत डाक से भी शिकायत भेजी इसलिए हम आपकी कोई मदद नहीं कर सकते। और ना ही हम आपसे अकेले में कोई बात करेंगे जो भी बात होगी वह कुछ लोगों के बीच होगी जो इसी ग्राम समाज के निवासी होंगे। सामाजिक बात सामाजिक मुद्दे सामाजिक विषय समाज के साथ ही अच्छे लगते हैं। यह हमारा आपका कोई अकेले का मुद्दा नहीं है। हमारे कुछ शुभचिंतकों द्वारा भी हमें समझाने के प्रयास में श्री अल्ताफ जी और उनके साथ पिंटू भाई लगे हुए हैं। जिसका हमने विरोध कर दिया है। हमने कहा कि जब समुचित प्राधिकारी हमसे बयान लेंगे तो आपने हमें जो अपने कष्ट बताए हैं हम वह भी उनके सामने रखेंगे और रही बात हमारे द्वारा निजी तौर पर माफ किए जाने की तो सामाजिक मुद्दे में समाज माफ करता है। हमने उन्हें एक प्रस्ताव दे रखा है कि अगर ग्राम सभा गढ़ाकुल के सभी राशन कार्ड धारकों मे से अगर 51% लोग भी आपको लिख कर माफ कर दें। तो हम समुचत प्राधिकारी से यह कहने की कोशिश करेंगे कि आप को माफ कर दिया जाए। आगे वह जैसा भी निर्णय ले सभी को स्वीकार करना होगा। हमने उनसे यह भी कहा कि अगर हम आपके विरुद्ध कोई कार्यवाही ना करें तो हमारा कोई नैतिक साहस नहीं बनता है कि हम दूसरे स्थानों के जगहों पर रहने वाले लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़े जब हम अपने मोहल्ले में खुद न्याय नहीं पा सकते तो भला हम दूसरी जगहों पर रहने वालों को क्या न्याय दिलाएंगे I हमें चाहिए कि हम अपनी लाखों रुपए की लाइब्रेरी में आग लगा दे। अगर हम खुद को ही न्याय नहीं दिला सकते तो हम दूसरों को क्या न्याय दिलाएंगे ? यह तो वही बात हो जाएगी की एक मुहावरा है कि-
◆◆◆◆◆घर की चादर मैली नाम बरेठा सिंह◆◆◆◆◆
और ऐसा उत्तर देकर हमने उनसे क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि हम कल आएंगे। देखते हैं आगे क्या होता है लेकिन हमारी यह सोच है की-
——**
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
मेरे सीने में हो या फिर तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

अब सवाल यह है कि पूरी कहानी को पढ़ने के बाद जिलापूर्ति अधिकारी महोदय कौन सा कदम उठाएंगे? लेकिन बात इतनी तो तय है। जो भी निर्णय होगा वह ग्राहकों पर ही निर्भर करता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here