ऑनलाइन शिकायत प्रणाली (आई.जी.आर.एस.) सिस्टम हो रहा फेल, आँख मूदकर लगाई जा रही रिपोर्ट

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना आईजीआरएस इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम को अफसर शाही निगल गई है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें अधिकारियों ने भौतिक रूप से समस्‍या का निस्‍तारण किए बिना ही गलत रिपोर्ट फाइल कर दी।

विकास कार्यों से लेकर बुनियादी समस्याओं के समयबद्ध और समुचित समाधान के लिए बनाए गए जनसुनवाई पोर्टल अफसरों की आंकड़ेबाजी के कारण मजाक बन गए हैं। सरकार की मंशा थी कि पोर्टल के जरिए लोगों की भागदौड़ बचेगी और उन्हें अपने घर और क्षेत्र में ही अपनी शिकायतों का निदान मिल जाएगा पर कमोवेश हर विभाग जनसरोकार से जुड़ी शिकायतों को लेकर उदासीन है।

सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण का मामला हो या छात्रवृत्ति और खाद्यान्न वितरण में अनियमितताओं की बात या फिर टूटी सड़कों और गंदगी की शिकायत, अफसर और उनके अधीनस्थ ज्यादातर के निस्तारित होने का दावा कर वाहवाही लूट रहे हैं।

दरअसल, मातहत दफ्तर में बैठ कर ही समस्याओं का निस्तारण दिखा कर फाइल क्लोज कर देते हैं और आला अफसर स्थलीय सत्यापन में रुचि नहीं दिखाते हैं। नतीजतन, शिकायतकर्ता और पीड़ित आदमी निस्तारण के फर्जीवाड़े की फाइल लेकर फिर से दफ्तरों के चक्कर लगाने लगता है।

अफसर अधिकांश शिकायतों का ऑफिस में बैठकर ही निस्तारण दिखाकर आख्या भी गलत तरीके से अपलोड कर दे रहे हैं। जब इसकी जानकारी शिकायत कर्ता को होती है तो वह परेशान होकर दोबारा शिकायत कर रहे हैं। आलम यह है कि पब्लिक का आईजीआरएस पोर्टल से भी भरोसा कम होता जा रहा है।

केस-1
वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने जनसुनवाई पोर्टल पर 12 अप्रैल को शिकायत की थी कि चांदपुर स्थित कलेक्ट्री फार्म बीज विकास निगम का बीज विधायन संयन्त्र द्वारा बड़े पैमाने पर प्रदूषण किया जा रहा है। शिकायत के निर्धारित समयावधि व्यतीत होने के बाद इसका रिमाइंडर भी किया गया के पश्चात जवाब में क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सादा पेज की फोटो अपलोड कर दी। इस बाबत शिकायतकर्ता द्वारा पोर्टल पर फीडबैक देकर शिकायत दर्ज कर संबंधित दोषी अधिकारी कर्मचारी को दंडित करते हुए समस्या के समाधान की मांग की है।

केस- 2
उक्त शिकायत कर्ता ने बीते साल 17 दिसंबर 2018 को पोर्टल पर शिकायत की थी कि चेक बाउंस के मामले में कोर्ट द्वारा जारी वारंट सारनाथ थाना द्वारा तामिला नही कराया जा रहा है, जिसे तामिल कराने की शिकायत की थी, निर्धारित समयावधि व्यतीत होने के पश्चात 6 बार रिमाइंडर किया गया के बावजूद आज तक उक्त शिकायत पर कुछ नहीं हुआ ना ही वारंट का तामिला हुआ।

केस-3
शिकायतकर्ता ने 19 अप्रैल को पोर्टल पर शिकायत की थी कि राजातालाब पुरानी पुलिस चौकी वाया रानी बाजार रेलवे क्रॉसिंग तक लोक निर्माण विभाग लोक निर्माण भवन वाराणसी द्वारा मानक के विपरीत नाला और सड़क निर्माण के कारण कचड़ा डंप फैल रहे प्रदूषण अधूरे सड़क और नाली निर्माण से धूल और और अवजल फैलने से लोग त्रस्त हैं, जवाब में क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने समस्या नगर विकास से संबंधित बताकर पल्ला झाड़ा था के पश्चात शिकायतकर्ता ने इसकी फीडबैक आपत्ति देने के पश्चात जिलाधिकारी वाराणसी ने 15 दिनों के भीतर आख्या तलब किया है लेकिन इस मामले में भी आज तक कुछ नहीं हुआ समस्या जस का तस है।

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