भ्रष्ट अधिकारी के विरुद्ध मुख्यमंत्री पोर्टल के आदेश को भी ठेंगा, एडीएम ने शिकायतकर्ता की फर्जी एफिडेविट, फर्जी सिम व आपत्ति के बावजूद आरोपी के पक्ष में किया निस्तारण

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मुकेश गुप्ता
नैनी, प्रयागराज

एडीएम (फ़ा0) राजितराम प्रजापति के भ्र्ष्टाचार का मामला।

13 महीने से अधिकारीगण कर रहे बचाव

प्रयागराज जनपद के नैनी थानाध्यक्ष सहित आज भी तमाम अधिकारीगण के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल व उच्च अधिकारियों के आदेश मायने नही रखते इसीलिए वे उच्च स्तर के आदेश को ठेंगा दिखाने से भी गुरेज नही करते।*

जानकारी के अनुसार आर के पाण्डेय एडवोकेट हाई कोर्ट इलाहाबाद के द्वारा प्रयागराज की ही एक संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कागजी नशा मुक्ति केंद्रों के विरुद्ध वर्ष 2017-18 में अनेकों लिखित व आईजीआरएस पर शिकायते की गई थी। आरोपी संचालक व्यापक पैमाने पर नशामुक्ति केंद्र, विद्यालय आदि का संचालन करता है व स्वजलधारा घोटाले से जुड़ा है तथा अपनी ऊंची पकड़ व रसूख के चलते पहले तो उसने शिकायतकर्ता को प्रलोभन दिया व न मानने पर धमकाया एवं बदमाशों से फोन भी कराया व शिकायत वापस न लेने पर आरोपी स्वयं उपायुक्त प्रयागराज व एडीएम मिर्जापुर के नाम से फर्जी फोन करके भी शिकायतकर्ता को धमकाया लेकिन तब भी बात न बनने पर वह आरोपी अपने तत्कालीन मित्र राजितराम प्रजापति एडीएम मिर्जापुर से मिलकर एक बड़ी साजिश किया जिसका खुलासा खुद एडीएम के फोन से ही हुआ।

बता दें कि तत्कालीन राजितराम प्रजापति एडीएम (फ़ा0) मिर्जापुर ने नशामुक्ति केंद्र की शिकायत के निस्तारण का आसान रास्ता आरोपी के साठगांठ से कर लिया व शिकायतकर्ता के नाम से फर्जी एफिडेविट बनाया व फर्जी सिम से फर्जी आईडी से शिकायत वापस लेने का फर्जी स्वांग करके शिकायत का निस्तारण आरोपी के पक्ष में कर दिया जिसकी जानकारी होने पर शिकायतकर्ता ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जिसे खुद शिकायतकर्ता के मोबाइल न0 9450505025, 7007020921 व उपरोक्त एडीएम के न0 05442252900, 9454061773 की काल डिटेल्स की तस्दीक से की जा सकती है। शिकायतकर्ता ने 15 व 19 मार्च 2018 व अन्य तिथियों में समस्त उच्च अधिकारियों से जरिये पंजीकृत डाक लिखित शिकायत की व मुख्यमंत्री के पोर्टल 1076 पर फोन करके भी शिकायत दर्ज कराई जिसकी जांच व विधिक कार्यवाही थानाध्यक्ष नैनी को मिले जिसे व लम्बे समय तक टालते रहे परन्तु पुनः शिकायत करने पर उसे थाना नैनी व थाना कौंधियारा का क्षेत्राधिकार बताकर टालते रहे जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी संस्था के मुख्यालय, संचालन, शिकायतकर्ता के निवास व शिकायत किये जाने के समय आदि के आधार पर प्रयागराज जनपद अन्तर्गत नैनी का ही क्षेत्राधिकार बनता है। बात करने पर पता चला कि सभी अधिकारी इस प्रकरण के एक एडीएम से जुड़ा होने के कारण उसे लगातार टाल रहे हैं। बड़ा सवाल यह यह के क्या कोई कानून इन भृष्ट अधिकारियों को खुलेआम भ्रष्टाचार की छूट देता है जबकि यही अधिकारी सामान्य मामले में भी गरीब व बेसहारा नागरिको को प्रताड़ित करने में कोई कोताही नही करते। फिलहाल शिकायतकर्ता राजितराम प्रजापति तत्कालीन एडीएम (फ़ा0) मिर्जापुर के भ्रष्टाचार के प्रकरण को मा0 हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी उठाने को तैयार है। शिकायतकर्ता का कहना है कि भ्र्ष्टाचार मुक्त भारत अभियान के तहत वह इस प्रकरण को किसी भी हद तक ले जाकर न्याय लेकर ही रहेगा।