बाल सुरक्षा के मुद्दे पर सामाजिक संगठनों व हितग्राहियों के साथ सबल संस्थान के मुख्यालय भरौली में किया गया परिचर्चा का आयोजन

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रामानन्द पाण्डेय की रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर

विज्ञान फाउंडेशन लखनऊ द्वारा वॉइस फॉर चेंज परियोजना के अंतर्गत बाल सुरक्षा के मुद्दे पर सामाजिक संगठनों व हितग्राहियों के साथ एक परिचर्चा का आयोजन सबल संस्थान के मुख्यालय भरौली में किया गया। परियोजना समन्वयक हरीश कुमार ने सीमावर्ती इलाकों में बाल सुरक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों के मुख्यतः 4 अधिकार है। 1- जीवन जीने का अधिकार, 2- विकास का अधिकार, 3- सुरक्षा का अधिकार 4- सहभागिता का अधिकार के तहत हर बच्चे को उनका अधिकार मिलना चाहिए जैसे शिक्षा खेल तथा मनोरंजन, गरिमापूर्ण जीवन जीना अभिव्यक्ति की आजादी, घूमने फिरने तथा स्वतंत्रता आदि।

मानव तस्करी पर चर्चा करते हुए डॉ वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव निदेशक ग्रामीण महिला रोजगार प्रशिक्षण केंद्र ने कहा कि मनुष्यों की तस्करी एक ऐसा संगठित अपराध है जो सीमा के भीतर या उसके बाहर कानूनी या गैर कानूनी तरीके से बल प्रयोग करके, धमकी जोर जबरदस्ती, छल-कपट या धोखे का प्रयोग कर या अन्य माध्यमों से, अपहरण, फ्राॅड, धोखे में रखकर, किसी को पैसे का लालच देकर या किसी से पैसा लेकर-किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के हाथों बेचना, जबरन श्रम कराना, दास प्रथा या बंधुआ मजदूरी या शारीरिक अंग काट देना, वैष्यावृति के प्रयोजन से व्यक्ति को दूसरे देशो में भेजना, बच्चों को बेचा जाना या खरीदा जाना, उन्हें भर्ती करना या उनका परिवहन या अंतरण करना मानव तस्करी कहलाता है।
मानव तस्करी के होने के मुख्य कारण पर चर्चा करते हुए बताया कि अत्यन्त गरीबी, शिक्षा का अभाव, संसाधनों का न होना, गाॅव तथा आस-पास रोजगार के अवसरों में कमी की वजह से, प्रेम प्रसंग के दुर्भाग्यपूर्ण अन्त के कारण, सौतेले मां-बाप, सगे सम्बन्धियों द्वारा शारीरिक, मानसिक व यौन शोषण एवं प्रताड़़ना के कारण।

मानव तस्करी किन किन उददेष्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है इन विन्दुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि मजदूरी – बंधुआ मजदूर, निर्माण कार्य से जुड़े बच्चे व स्त्रियाँ, घरेलू नौकर, कालीन उद्योग व कपड़ा उद्योग में, चूड़ी कारखानों में बच्चों का इस्तेमाल करना आदि।

गैर कानूनी काम के लिए- जैसे बच्चों से भीख मंगवाना, मानव अंगो के व्यापार के लिए, दत्तक ग्रहण द्वारा/गोद लेने के जरिए, नशीले पदार्थों की तस्करी हेतु, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय मार्गों पर गैरकानूनी रुप से महिलाओं और बच्चों के शोषण के लिए।

यौन शोषण हेतु – वेश्यावृति, पर्यटन संबंधी यौन शोषण, अश्लील चित्रण आदि।

मनोरंजन के लिए – बच्चों का इस्तेमाल करना सर्कस, नृत्य मण्डली (आर्केस्ट्रा)।

विवाह हेतु – जबरन विवाह, विवाहोपरान्त तंग करना, झूठे विवाह का आश्वासन देना।

चाइल्ड लाइन समन्वयक सुनील उपाध्याय ने चाइल्ड लाइन के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बाल श्रम पर चर्चा करते हुए बताया कि आजकल हम सभी किसी छोटे बच्चें को किसी दुकान, होटल, चाय की दुकान, तस्करी में कैरियर के रूप में आदि जगह पर काम करते हुए देखते है। बालश्रम की समस्या एक चुनौती बनी हुई है यह सामाजिक आर्थिक समस्या मानी जा रही है जो कि जानकारी का अभाव अर्थात चेतना की कमी, गरीबी और अषिक्षा आदि से जुडी हुुई है इसकों रोकने के बहुत से उपाय सरकार द्वारा चलाये जा रहे है लेकिन अधितर स्थानो पर बाल मजदूरी अधिक ही है।
बालश्रम को रोकने के लिए हमसभी को संकल्प लेना होगा-

● जब हम किसी बच्चे को शोषित होते हुए देखे तो उसकी व्यक्तिगत मदद करें।
● बच्चों की सुरक्षा के लिए कार्यकरने वाली संगठनों के लिए स्वेच्छा से समय निकाले।
● व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से कहें कि यदि वे बच्चों से श्रम करायेंगे तो उनसे कुछ भी नही खरीदेंगे।
● आपके किसी रिश्तेदार या परिजनों के यहां बाल श्रम होता है तो आप सब उनका सामाजिक बहिष्कार करें।
● बालश्रम कराने वाले अभिभावकों को प्रोत्साहित करे कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें।
● यदि कही कोई बच्चा मुसीबत में है तो तुरन्त ही चाइल्डलाइन 1098 पर काॅल करें।

कार्यक्रम में शोहरतगढ़ एनवॉयरनमेंटल सोसाइटी के कलाकांत जी तथा श्री अमित कुमार उपनिरीक्षक थाना ढेबरुआ ने बाल सुरक्षा पर विस्तार से जानकारी दी कार्यक्रम का संचालन श्री दीनानाथ सचिव सबल संस्थान ने किया।

कार्यक्रम में गैर सरकारी संस्था SES, GMRPK, बुद्धा फाउंडेशन, प्लान इंडिया, मानव सेवा संस्थान, सबल संस्थान, स्वंय सहायता समूह की बहनों के साथ युवा मंच, बाल समूह, एडवोकेट, अध्यापक आदि लोगो ने प्रतिभाग किया।