जिले में नेत्रदान करने के लिए चल रहा जागरूकता पखवाड़ा, आठ सितंबर तक जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों से नेत्रदान के लिए किया जाएगा जागरूक

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अरविन्द द्विवेदी की रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर

राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टिक्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा चलाया जा रहा है। आठ सितंबर तक चलने वाले जागरूकता पखवाड़े में जिस व्यक्ति को अपनी मृत्यु के बाद नेत्रदान करना है वह पंजीकरण कराकर नेत्रदान कर सकते हैं। यह जागरूकता अभियान जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रो से चलाए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि जिले में 34वां नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस जागरूकता पखवाड़े के तहत लोगों को बताया जा रहा है कि मृत्यु के बाद नेत्रदान कर दूसरे को नया जीवन दिया जा सकता है। अभियान के जरिए दृष्टिक्षीणता वाले लोगों की पहचान कर उनका इलाज करके दृष्टक्षीणता के मामलों को कम करना है। नेत्र देखभाल सेवाओं के लिए मानव संसाधन विकसित करना, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता में सुधार लाना, नेत्र देखभाल में सामुदायिक जागरूकता को बढ़ावा देने का काम अभियान के दौरान किया जाएगा। नेत्रदान मृत्यु के बाद ही किया जाता है। शोकाकुल परिवार के बीच नेत्रदान करना जटिल होता है लेकिन समाजसेवी व अन्य जागरूक लोगों की भूमिका इसमें अहम होती है। जिले में कोई भी व्यक्ति नेत्रदान करना चाहता है तो वह पंजीकरण कराकर नेत्रदान कर सकता है। यह जागरूकता कार्यक्रम आठ सितंबर तक चलेगा। सीएमओ डॉ. आईवी विश्वकर्मा ने बताया है कि व्यक्ति के मृत्यु के बाद उसके आंख से दूसरे की जिंदगी रोशन की जा सकती है, इसलिए जागरूकता अभियान में सभी को लगाया गया है।

सीएचसी-पीएचसी से जागरूकता- नेत्रदान के प्रचार-प्रसार के लिए जिले के सभी सीएचसी-पीएचसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अस्पताल की टीम भी लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कार्निया मरीज को दूसरे नेत्र की जरूरत- छोटे बच्चों को कार्निया नेत्रहीनता की दिक्कत होती है। इसके उपचार के लिए किसी व्यक्ति के मृत्यु होने के बाद उसकी आंख के कार्निया को मरीज के आंख में लगा देने से रोशनी वापस लाई जा सकती है। इससे उसका अंधापन दूर किया जा सकता है।