श्रीराम मंदिर निर्माण के साथ राम राज्य हेतु समानता व योग्यता का सम्मान भी जरूरी

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श्रीराम मंदिर निर्माण के साथ राम राज्य हेतु समानता व योग्यता का सम्मान भी जरूरी

पर्दाफाश न्यूज टीम प्रयागराज। —देश में भ्रष्टाचार व जातिवादी वोट बैंक का खेल विनाशकारी।
—निःशुल्क व समान शिक्षा, चिकित्सा व सुरक्षा हो अनिवार्य। नैनी, प्रयागराज, 06 अगस्त 2020। अयोध्या में भव्य व दिव्य श्रीराम मन्दिर निर्माण के साथ राम राज्य के सपने को साकार करने के लिए देश में निःशुल्क व समान शिक्षा,चिकित्सा व सुरक्षा तथा भ्रष्टाचार मुक्त परिवेश से ही देश का कल्याण होगा।
एनजीओ परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी के प्रबंधक आर के पाण्डेय एडवोकेट ने आज मीडिया से वार्ता में कहा कि अयोध्या में भव्य व दिव्य श्रीराम मन्दिर का निर्माण अत्यंत उत्साहवर्धक है परंतु इसी के साथ राम राज्य की संकल्पना साकार करने हेतु देश में भ्रष्टाचार मुक्त परिवेश व निःशुल्क एवं समान शिक्षा, चिकित्सा व सुरक्षा की व्यवस्था बनाने तथा जातिवादी वोट बैंक के राजनैतिक खेल को खत्म करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह दुखद व शर्मनाक है कि 73 वर्षों की आजादी के बावजूद देश में मंहगी व आसमान शिक्षा, चिकित्सा व सुरक्षा से आम जनता महरूम है। आज भी बड़े स्कूल में दाखिला, अच्छे अस्पताल में इलाज व सुरक्षित जीवन अधिकांश भारतीयों के लिए सपना ही है जबकि अधिकांश राजनैतिक दल संवैधानिक प्रावधानों की आड़ में जातिवादी आरक्षण से जातीय वोट बैंक का खेल खेल रही हैं जोकि देश के लिए नुकसानदायक है। देश के प्रत्येक योग्य प्रतिभावान नागरिक का सम्मान होना चाहिए व सभी को एक समान शिक्षा, चिकित्सा व सुरक्षा की व्यवस्था मिलनी चाहिए। विभिन्न योजनाओं व विभागों में भ्रष्टाचार खत्म करके सभी सरकारी सुविधाएं नागरिकों को मुहैया कराई जानी चाहिए। इसके लिए नागरिकों के साथ विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका को सामने आकर देशहित में मजबूती से कार्य करने की जरूरत है। हाई कोर्ट इलाहाबाद के अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने प्रश्न उठाया कि 73 साल की आजादी के बावजूद देश की अधिकांश जनता जनार्दन गरीबी का जीवन क्यों जी रही है जबकि गरीबों के नाम पर आगे बढ़ने वाले नेता, चन्द रुपयों के वेतनभोगी कर्मचारी अकूत सम्पत्ति के मालिक कैसे बन जाते हैं? उन्होंने कहा कि हमने एक क्रांति अंग्रेजों से आजादी पाने के लिए की थी लेकिन अब उस आजादी को बचाने एवं भ्रष्टाचार मुक्त भारत व समान अधिकार हेतु महाक्रांति की जरूरत है जिसमे आम जनमानस के साथ विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के समग्र सहयोग की आवश्यकता है।