जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना न देने पर जन सूचना अधिकारी के रूप में ग्राम पंचायत अधिकारी संजीव कुमार कैराती पर राज्य जनसूचना आयोग ने लगाया 10,000 रूपये का जुर्माना

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निजामुद्दीन सिद्दीकी की रिपोर्ट
बलरामपुर

सूचना का अधिकार कानून ने हर किसी को जनहित में सवाल पूछने का समान अधिकार दिया है। जिसको लेकर आए दिन कुछ ना कुछ खुलासे होते रहते हैं ताजा मामला जनपद बलरामपुर के विकास खंड पचपेड़वा के ग्राम पंचायत शंकरपुर का है।

ग्राम पंचायत अधिकारी संजीव कुमार कैराती से लगभग दो वर्ष पहले जनपद सिद्धार्थनगर के हलौरा निवासी पंकज चौबे ने “जनसूचना अधिकार अधिनियम” 2005 के तहत ग्राम पंचायत अधिकारी संजीव कैराती से विकास कार्यों से सम्बंधित कुछ सूचनाएं मांगा था,लेकिन कुछ समय के बाद भी ग्राम पंचायत अधिकारी संजीव कुमार कैराती द्वारा कोई सूचना नहीं दिया गया,तो यह मामला राज्य जनसूचना आयोग मे पहुंच गया।

ग्राम पंचायत अधिकारी संजीव कैराती को तलब किया गया की आयोग द्वारा दिए गए तारीख पर आयोग मे उपस्थित हो। साल भर बीतने के बाद भी सूचना न दिए जाने पर आयोग ने फटकार लगा कर सूचना न देने का कारण पूछा और कहा था की क्यों सूचना देने मे देर ये हस्तलिखित प्रेषित करें,तो ग्राम पंचायत अधिकारी ने कहा की मुझे एक मौका और दे दीजिये मैं सूचना दे दूंगा,न्याय हित मे राज्य जनसूचना आयोग ने एक अवसर और देते हुए निर्देशित किया की जल्द से जल्द युवक को सूचना दिया जाये।

राज्य जनसूचना आयोग के द्वारा दिए गए समयानुसार जब ग्राम पंचायत अधिकारी ने नियम की अवहेलना करते हुए 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी सूचना नहीं दिया तो राज्य जनसूचना आयोग ने 2 वर्ष के कार्यकाल के मुआवजे को जोड़ते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी संजीव कुमार कैराती पर 10,000 रूपये का अर्थदंड लगा दिया है,और साथ ही साथ आयोग ने जिला पंचायती राज अधिकारी बलरामपुर को ये निर्देश दिया है की इस अर्थदंड की भरपाई ग्राम पंचायत अधिकारी संजीव कुमार कैराती के मानदेय से किया जाये और आयोग द्वारा दिए गए समय के अंदर अर्थदंड 10,000 रूपये को आयोग के लेखा शीर्षक मे जमा किया जाना सुनिश्चित करें।

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