क्या वाकई अधिवक्ताओं का नहीं बनता है राशन कार्ड? राशन कार्ड प्रकरण को लेकर अधिवक्ता नगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने विभागीय अधिकारियों को लिखा पत्र

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पर्दाफाश न्यूज़ टीम
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

वैसे आज प्रभावी रूप से तक इन सवालों का जवाब नहीं मिल पाया कि आखिर क्या वाकई में अधिवक्ताओं का राशनकार्ड वाकई नही बनता है और राशन कार्ड बनवाने की विधिक प्रक्रिया क्या है? जिसको लेकर हमेशा गलत बातों व तत्थों का विरोध करने वाला अधिवक्ता नगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने सोसल मीडिया के साथ राशन कार्ड विभाग के जिला पूर्ति अधिकारी, सिद्धार्थनगर को संबोधित प्रार्थना पत्र में लिखा कि, ” महोदय- अज्ञानता हमेशा दुखद परिणाम लाती है और प्रतीत होता है कि हम भी इसकी परिधि में आ गए जिसका हमें दुख है।”

उन्होंने आगे लिखा कि, “संक्षेप में निवेदन है की कतिपय कारणों से हमारे शुभचिंतकों द्वारा हमारी पत्नी डॉ विभा श्रीवास्तव के नाम से चार यूनिट का राशन कार्ड इस वर्ष 2020 में बन गया बचपन से लेकर 48 साल तक की उम्र में भगवान की कृपा से हमें राशन कार्ड की कोई जरूरत नहीं पड़ी इसलिए हमने कभी उस संदर्भ में ध्यान भी नहीं दिया लेकिन लखनऊ में कुछ कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में लोगों ने मांगा तो हमें असुविधा हुई हमने अपनी समस्या लोगों के सामने रखी तो शुभचिंतकों ने बनवा दिया, परंतु इस के संदर्भ में मुझे बाद में मालूम हुआ की कुछ विशेष मानक है जिन मानकों के आधार पर ही लोगों का राशन कार्ड बनता है। शोहरतगढ़ कस्बे में एक कोटेदार के प्रकरण में जब जीवन में हमने पहली बार लोगों के यह बताने पर की 3 महीने में अगर एक बार भी राशन नहीं लिया जाएगा तो राशन कार्ड निरस्त हो जाएगा राशन ले लिया, जिसका विवाद अभी लंबित है, खैर यहां विषय दूसरा है।”

अब यही कहानी टर्न लेती है। उन्होंने यह भी लिखा कि, “हमारे कुछ अधिवक्ता भाइयों ने हमसे पूछा कि आपका राशन कार्ड कैसे बन गया अधिवक्ताओं का तो बनता ही नहीं है ? हमने कहा हमें राशन कार्ड बनने बनवाने की प्रक्रिया नहीं मालूम है। शुभचिंतक लोग ही कागजपत्र लेकर बनवाए हैं फिर भी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करता हूं। हम यह जरूर जानना चाहेंगे की अधिवक्ताओं का राशन कार्ड क्यों नहीं बनता है? क्योंकि अधिवक्ताओं में भी सबकी आय और परिस्थिति अलग-अलग है तो सिर्फ इतना कह देने से की अधिवक्ताओं का राशन कार्ड नहीं बनता यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप नहीं कहा जा सकता है ।

कार्ड धारकों की पोल खोलते हुए उन्होंने यह भी लिखा कि, – क्योंकि हमारी जानकारी में यह भी आया है कि शोहरतगढ़ कस्बे में ही अगर राशन कार्डों की धरातल पर जांच कराई जाए तो तमाम ऐसे राशन कार्ड होल्डर हैं जो स्वयं अंत्योदय कर सकते हैं परंतु खुद का अंत्योदय कार्ड बनवा कर राशन ले रहे हैं । अगर अधिवक्ता भाइयों का राशन कार्ड नहीं बन सकता तो फिर ऐसे राशन कार्ड होल्डरों की भी धरातल पर जांच करवाने की आवश्यकता प्रतीत होती है।”

माननीय अध्यक्ष सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन, सिद्धार्थनगर को प्रतिलिपि प्रेषित करते हुए लिखा कि वे इस प्रकरण में अधिवक्ताओं के हित में सक्रिय रुचि लेने की कृपा करें और अगर हमारा राशन कार्ड भूल वश गलत तरीके से बन गया है और मानक के विपरीत है तो कारण बताते हुए उसे निरस्त करने की कृपा करें साथ ही अगर अधिवक्ताओं का राशन कार्ड बन सकता है तो उस संदर्भ में भी जानकारी देने का कष्ट करें जिससे तमाम अधिवक्ता भाई अपना राशन कार्ड बनवाना सुनिश्चित कर सकें।

अब देखना यह है की खाद एवं रसद विभाग क्या जमीनी स्तर पर अंत्योदय और पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों की जांच निष्पक्ष रुप से कर पाएगा या कहानी टाय-टाय-फिश हो जाएगी।

बताते चले कि विभाग द्वारा पारदर्शी व्यवस्था के लिए सार्वजनिक वेबसाइट बनाई जहाँ पूरे उत्तर प्रदेश का राशन कार्ड देखा जा सकता है।

http://fcs.up.gov.in/FoodPortal.aspx

जनपद वार सूची हेतु लिंक-

https://nfsa.up.gov.in/Food/citizen/Default.aspx

https://nfsa.up.gov.in/Food/citizen/Default.aspx