भूमाफियाओं ने कुले को पाटकर बनाया प्लाट के लिए रास्ता, ग्रामीणों ने की शिकायत, नगर पंचायत के दखल के बाद तहसील प्रशासन ने आधा अधूरा कराया खाली, मनरेगा से 3 बार में 4.69266 लाख रुपये का कराया गया भुगतान

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पर्दाफाश न्यूज़ टीम
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

यूं तो हूं भू-माफियाओं का कब्जा सार्वजनिक सम्पत्ति पर आज से नहीं, बल्कि बरसों पुराना है। कभी छुट भैया नेता बड़े नेताओं को देखकर भूमाफिया बन जाते हैं तो कभी अवैध कमाई और रातो-रात करोड़पति बनने का सपना भी लोगों को भू-माफिया बनने पर मजबूर कर देता है।

ताजा मामला शोहरतगढ़ तहसील गेट से महज 500 मीटर मीटर सेठ राम कुमार खेतान बालिका विद्यालय के पीछे वाली कुले की है। अभिलेखों पर गौर करें तो वर्ष 2008-09 में नीबी दोहनी ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा योजनान्तर्गत खेतान बालिका विद्यालय से दोई नदी तक कुला खु०/पु ० का कार्य (आईडी संख्या-3151005028/आर सी/228) पर 1218 व्यक्तियों की मदद से 1.218 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान लेकर कुला खुदाई का कार्य कराया गया है। इसके साथ ही वर्ष 2016-17 में दूसरी बार खेतान बालिका स्कूल के पीछे से दूरी नदी नदी तक खुला खुदाई कार्य (आईडी संख्या-3151005028/पी एफ/9885902749) पर 1148 व्यक्तियों की मदद से 1.99752 लाख रुपये व वर्ष 2018-19 में तीसरी बार खेतान स्कूल से दोई नाला तक कुला खुदाई का कार्य ग्राम पंचायत मलगवा द्वारा (आईडी संख्या-3151005052/पीएफ/958486255822892404) पर 812 व्यक्तियों की मदद से 1.47714 लाख रुपये की मजदूरी से कार्य कराया गया है। जिसका उद्देश्य पानी की निकासी वह किसानों की सिंचाई के लिए किया गया था।

और यह कहना लगत नही होगा कि उसी कुले को तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से पाटकर लगभग 500 मीटर लंबा चौड़ा चकरोड बनाया गया जिसमें भ्रष्टाचार की बू आ रही है। हाल ही में जब नगर पंचायत द्वारा उस पर आपत्ति जताई गई तब आनन-फानन में में तहसील प्रशासन की एक जिम्मेदार अधिकारी ने करीब 200 मीटर कुले को आधा अधूरा खनाकर मामले में लीपापोती करनी चाहिए।

बताते चले कि इस संदर्भ में पूर्व में शोहरतगढ़ सीमा विस्तारित क्षेत्र के नारायनपुर, मेढवा, चांदा पार उर्फ शोहरतगढ़, नीबी दोहनी के दर्जनों किसानों ने शोहरतगढ़ नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी व नगर अध्यक्ष महोदया को संबोधित प्रार्थना पत्र में अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि महोदय हम सब किसान है। हम प्रार्थी गण का कृषि योग्य भूमि उक्त क्षेत्र में स्थित है उक्त कृषि क्षेत्र में बरसात के समय में बाढ़ की विभीषिका जब अपना प्रलय मचाती है तो हम सबका खेत पानी से डूब जाता है ऐसे समय में खेतों के पानी के बहाव को निकालने के लिए कुला, नहर कई वर्षों पूर्व से बनाया गया है। उससे खेतों के पानी की निकासी व जरूरत पर सिंचाई का कार्य कराया जाता है पर उन्हीं कुला व नहरों को भू माफियाओं द्वारा अवैध रूप से कब्जा करके प्लाटिंग आदि का कार्य किया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बनकर सब कुछ देख रहा है।

वर्ष 2008-2009 में मनरेगा द्वारा कराया गया कार्य
वर्ष 2016-2017 में मनरेगा द्वारा कराया गया कार्य
वर्ष 2018-2019 में मनरेगा द्वारा कराया गया कार्य

बताते चलें कि क्षेत्र में यह प्रकरण नया नहीं है इसके पूर्व भी तहसील प्रशासन की मिली भगत से कई लोगों को गलत तरीके से पट्टा स्वीकृत किया, जो लोगों के बीच शोहरतगढ़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। तहसील प्रशासन के हल्का लेखपाल राम कुमार तिवारी ने बताया कि जो कुला पाटकर पाटकर रास्ता बनाया जा रहा है आंशिक रूप में अभिलेखों में रास्ते के रूप में दर्ज है, शेष कुले के रूप में नाली दर्ज है। अब सवाल यह है कि आखिर भू माफियाओं को कैसे पता चला कि वह रास्ता जो कि कई दशकों से ही वह खुले के रूप के रूप में लोग उससे किसान सिंचाई का कार्य करते रहे और अधिक बरसात में जल की निकासी भी होती रही। यही नहीं जानकारों की मानें तो ग्राम पंचायत स्तर 3 बार मनरेगा द्वारा कुला खुदाई का कार्य भी कराया गया है। यदि जिम्मेदारों को यह पता था कि वह खुला नहीं सड़क है तो फिर कुला खुदवाकर धन का बंदरबांट क्यों किया गया ? क्या भू माफियाओं को तहसील व ब्लॉक प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है? सबसे बड़ा सवाल है।

इस संदर्भ में नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि हिंदू युवा वाहिनी देवी पाटन मण्डल प्रभारी सुभाष गुप्ता ने कहा कि प्रकरण संज्ञान में है। वहां के किसान हमारे पास समस्या लेकर आये थे, जिसका संज्ञान लेकर तहसील प्रशासन से आख्या/रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर मामला क्या है? तहसील प्रशासन से रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

इस संदर्भ में उप जिलाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद उसकी गंभीरता से जांच की जाएगी बहरहाल मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है।

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