परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी ने शिक्षा के बाजारीकरण के विरुद्ध चलाया जागरूकता अभियान

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परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी ने शिक्षा के व्यवसायीकरण के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया

पर्दाफाश न्यूज टीम।
नैनी, प्रयागराज। एनजीओ परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी ने शिक्षा के व्यवसायीकरण के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाते हुए आम भारतीय नागरिकों के विचार व सुझाव आमंत्रित किये हैं।
जानकारी के अनुसार संस्था परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक/प्रबन्धक आर के पाण्डेय एडवोकेट ने प्राइवेट व कारपोरेट घराने के विद्यालयों द्वारा मान्यता के मानक व शर्तों के विपरीत शिक्षा का व्यवसायीकरण करने के विरुद्ध लोगों को जगरुक्त करते हुए उनके विचार व सुझाव आमंत्रित किये हैं।
बता दें कि इस संस्था ने पहले से ही कोरोना संकट के चलते सरकार से उत्तर प्रदेश के सभी विद्यार्थियों की 06 महीने की फीस माफ करने की मांग की है जबकि आज लोगों को जागरूक करते हुए समाज को चिंतन करने हेतु प्रेरित किया है।
संस्था के तरफ से प्रबन्धक आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि विश्वव्यापी कोरोना महामारी के राष्ट्रीय आपदा से उतपन्न वर्तमान परिस्थिति में अधिकांशतः अवैतनिक, मध्यम वर्ग, गरीब सवर्ण, छोटे व फुटपाथिया व्यापारी, किसान, हॉकर, पत्रकार व अधिवक्ता आदि के आय लगभग बन्द हैं तो ऐसी स्थिति में भी प्राइवेट विद्यालयों द्वारा गर्मी की छुट्टी में भी आन लाइन पढाई के नाम पर फीस वसूली, किताब, कॉपी, स्टेशनरी, बैग व ड्रेस के नाम पर धन उगाही, आन लाइन पढाई के नाम पर केवल हवाट्सएप्प पर असाइनमेंट देना, फीस वृद्धि करना आदि सुनियोजित षड्यंत्र है। आप स्वयं अपने बच्चों, उनके पढाई व विद्यालय की व्यवस्था पर विचार करें कि :-
01- क्या लॉक डाउन व गर्मी की छुट्टी में आन लाइन पढाई उचित है?
02- क्या विद्यालय में आन लाइन पढाई की समुचित व्यवस्था है?
03- क्या विद्यालय मान्यता प्रमाण पत्र के शर्तों का पालन करते हैं?
04- क्या सरकार व शिक्षा विभाग ने आन लाइन अध्ययन-अध्यापन हेतु गाइड लाइंस जारी किए हैं?
05- क्या आपके फीस जमा कर देने पर विद्यालय वर्तमान शिक्षा-सत्र में 220 दिन कक्षाएं चलाने की लिखित गारंटी देंगे?
06- मान्यता की शर्तों व सरकार एवं शिक्षा विभाग के निर्देशों के विपरीत एक ही बोर्ड के विद्यालय अलग-2 प्राइवेट प्रकाशन की पुस्तकें प्रति वर्ष बदलकर क्यों चलाते हैं?
07- क्या लॉक डाउन व आन लाइन व्यवस्था में विद्यालय के संशाधन भवन, फर्नीचर, वाचनालय, प्रयोगशाला, स्टेशनरी, स्टाफ आदि का उपयोग विद्यार्थी कर रहा है?
08- क्या दशकों से विद्यालय चला रहे प्रबन्धन लॉक डाउन में अपने स्टाफ व विद्यार्थियों का सहयोग नही कर सकते?
09- क्या अनावश्यक फ्री, सब्सिडी, कर्जमाफी, जातिवादी व मजहबी एवं तमाम नेताओं के सुरक्षा के नाम पर अरबों रुपये लुटाने वाली सरकार अपने देश के भविष्य विद्यार्थियों की 06 माह की फीस माफ नही कर सकती?
10- क्या आपके स्थानीय नेता, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, सामाजिक संगठन आज तक प्राइवेट विद्यालयों के व्यवसायीकरण व तानाशाही के विरुद्ध आवाज उठाये?
11- क्या आन लाइन शिक्षण के नाम पर विद्यालय प्रबंधन, कारपोरेट घराने व जनप्रतिनिधियों ने सम्मिलित रूप से अभिभावकों व विद्यार्थियों पर दवाव नही बना रहे हैं?
यदि आपको लगता है कि उपरोक्त पर विचार आवश्यक है तो आइए मिलकर आवाज उठाएं व सरकार व शिक्षा विभाग से आन लाइन शिक्षण एवं कोरोना संकट काल मे विद्यालयों के लिए गाइड लाइंस बनवाएं व उसके बाद ही फीस जमा करने जैसे विषय पर विचार करें तथा कोरोना संकट काल मे अपने बच्चों पर पढाई का बेवजह दबाव न बन्सएँ व न ही बनने दें बल्कि अपने बच्चों को स्वतंत्र व तनावमुक्त बनाएं। इस अवसर पर संस्था ने 7007020921 व 9450505025 दो हेल्प लाइन नम्बर भी जारी किए हैं।