साधु संतों के भरण-पोषण के लिए भाजपा नेता योगेन्द्र जायसवाल ने राहत पैकेज उपलब्ध कराने की, की मांग, तहसीलदार राजेश कुमार अग्रवाल ने लिया संज्ञान, मात्र शोहरतगढ़ में ही होंगे सैकड़ों साधू सन्यासी, जिनके सामने है लॉक डाउन का संकट

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पर्दाफ़ाश न्यूज़ टीम
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

कोरोना वायरस व लॉक डाउन के चलते सामान्य जनजीवन ही नही अपितु सनातन धर्म का अलख जगाने वाले साधू संतो के भारण पोषण के लिए भी चिंता का विषय है।

जिसका मुद्दा भाजपा नेता योगेन्द्र जायसवाल ने उठाया है । उन्होंने ट्विटर के माध्यम से जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर /मुख्यमंत्री पूज्य #योगी आदित्यनाथ महाराज एवं प्रधानमंत्री #नरेन्द्र मोदी जी को टैग करते कहा कि “सनातन धर्म का अलख जगाने वाले पूज्य साधू संतो के भारण पोषण के लिए भी कोई राहत पैकेज उपलब्ध कराने की कृपा करे, इस लाकडाउन मे कुछ आश्रम में संतो की हालत दयनीय हैं।”

इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी साधु सन्यासियों के पक्ष में अपनी बात कही, जिसका संज्ञान लेते हुए शोहरतगढ़ तहसीलदार राजेश कुमार अग्रवाल ने ऐसे लोगों की सूची की मांग की।

भाजपा नेता योगेन्द्र जायसवाल ने कहा,- धन्यवाद सरजी! मेरे पोस्ट पर ध्यान देने के लिए। वैसे मेरे नाम बताने से कोई असहाय संत छूट गये तो उसका पाप दोष का भागीदारी हम बनेंगे इसलिए आपसे आग्रह हैं कि आप अपने हल्का लेखपाल से साधू संतो का नाम व स्थान चयनित कराये तो बेहतर होगा वैसे हमने शासन प्रशासन से यह मांग पुरे प्रदेश देश के लिए किये जो आपको कुछ संतो का नाम व स्थान भी बताने का जिम्मेदारी हैं अधिक जानकारी आपके लेखपाल कर्मचारी तहसील में ही बैठकर अपने हल्का के ग्राम पंचायत प्रधान आदि से तुरंत पाप्त कर सकते हैं।

वैसे महथा बाजार मे श्री वासुदेव मंदिर प्रांगण में पूज्य रामनरेश दास महाराज जी त्यागी बाबा जो दो माह से मंदिर से गिर जाने के कारण बिस्तर पर हैं जिनका उपचार हम लोग ही करवा रहे है जहा स्थिति आप स्वयं जाकर देख‌कर सोचने पर मजबूर हो जायेंगे वहा चार पाच साधू संत आपको मिलेंगे* यहाँ से कुछ दूरी पर ग्राम कोमर मे सती माता जी के स्थान हैं जहा पर आपको चार पाच संत कुटिया मे मिलेंगे, ग्राम पंचायत जुगडिहवा मे गाँव के पूर्व संतो का कुटी हैं, मसिना झिरझिरया मंदिर पर आपको संत लोग मिलेंगे झरुआ गाँव में कुछ गरीब हैं भूमिहीन रिक्शा चालक कुमार व गाँव के पुर्व मन्दिर पर बाबा बेलभद्दर दास जी मिलेंगे …..शेष आप अपने लेखपाल से हर गाँव में कुटी बनाकर निवास कर रहे संतो का नाम ब्यौरा ले सकते है।

बताते चलें कि लॉक डाउन न होने के कारण मंदिर खुले रहते थे जिसमें श्रद्धालु अपनी शक्ति के अनुसार दान दक्षिणा देते थे जिनसे साधु सन्यासियों का भरण पोषण होता था लॉक डाउन के कारण विगत 25 मार्च से ही धार्मिक स्थान बन्द है जिसके कारण साधू सन्यासियों के सामने