बढ़नी कस्बे सहित दर्जनों गावों में हो रही जमकर मुनाफाखोरी, जनता के सवाल करने पर केंद्र व राज्य सरकार के विषय मे बोलते हैँ अभद्र भाषा

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निजामुद्दीन सिद्दीकी की रिपोर्ट
बढ़नी, सिद्धार्थनगर

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण तथा लॉकडाउन के बीच जहां लोग बेबसी व मुफलिसी के आलम में जीवनयापन कर रहें हैं वहीं नगर पंचायत बढ़नी बाजार के किराना स्टोर के कुछ दुकानदार इस महामारी मे भी मानवता के जगह हैवानियत व मुनाफाखोरी का नंगा नाच करने को भी आतुर दिख रहे हैं, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉकडाउन की घोषणा किये जाने के बाद माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गरीब परिवारों को नि:शुल्क राशन वितरण किये जाने का निर्देश दिया गया था जो की शासन के मंशानुसार हुआ भी, लेकिन लॉकडाउन के आड़ मे बढ़नी बाजार के दुकानदार समाज के चाहे अमीर वर्ग हो या गरीब दोनों ही वर्गों से खूब बढ़ चढ़कर मुनाफाखोरी कर रहे हैँ और मुनाफाखोरी का ये काला बाजारी लॉकडाउन के घोषित होने के बाद से ही चल रहा, आपको बताते चले की लॉकडाउन के घोषणा होने के कुछ दिन बाद ही जिले के ऊर्जावान जिलाधिकारी दीपक मीणा द्वारा दैनिक प्रयोग की सभी जरुरी वस्तुओ का मूल्य निर्धारित कर सूची सभी दुकानदारों को जारी कर दिया गया था,लेकिन जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी दुकानदार अपने मनमानी तरीके से सामानो के दाम वसूल रहे हैँ, अगर कोई ग्राहक सवाल करता है तो दुकानदार ग्राहकों को उसे खरी खोटी सुनाकर केंद्र व राज्य सरकार के विषय मे अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए फ़ज़ीहत करते हैँ,आपको बता दे की यह सिर्फ बढ़नी बाजार मे ही नहीं बल्कि बढ़नी ब्लॉक के डढ़उल, बैरिहवा, जमधरा, परसा दिवान, मड़नी,मधवानगर, जियाभारी, औरहवा, भरौली, ढेबरुआ, बसावन पाकर उर्फ़ मदरहिया, तुलसीसियापुर ऐसे दर्जनों गांववो मे मुनाफाखोरी हो रहा है साथ ही साथ आपको बता दे की भारत सीमा पूरी तरह से सील कर दिया गया है लेकिन आश्चर्य की बात है की वहीँ ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों पर नेपाली गुटखा व नेपाली सिगरेट (खुखरी) आदि नेपाली सामान मिल जा रहे हैं,पहला सवाल ये है की आखिर जब सीमा इंडो नेपाल सीमा पूरी तरह से सील है तो इन लोगो को नेपाली ब्रांड के सामान मिल कहा से रहे हैँ इस लॉकडाउन को लेकर शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के सभी प्रशासनिक पदाधिकारी लगभग बढ़नी क्षेत्र का आयेदिन दौरा करते रहते हैँ लेकिन शायद किसी ने भी जमीनी स्तर पर जाकर जिलाधिकारी के फरमान का जायजा नहीं लिया की इसका पालन हो रहा है या नहीं जबकि इस महामारी मे यह बहुत जरुरी था, लेकिन दूसरा सवाल ये उठता है की इस महामारी मे क्या अधिकारी जमीनी स्तर की समस्याओ को जानने की कोशिश नहीं करते हैँ या हाथ पर हाथ रख कर बैठे हुए हैँ, दुकानदारों के इस मुनाफाखोरी व भारत नेपाल सीमा के कड़ी तरह से सील होने के बाद नेपाली सामान का भारत के दुकानों पर बिकना किस तरफ इशारा करता है? आखिर मे इन सबका जिम्मेदार कौन है?

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