NDTV के रविश कुमार को अधिवक्ता नागेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने दी तर्कसंगत सलाह, कहा आपके बारे में जो सकारात्मक धारणा बनाई थी वह आप ही के भोजपुरी स्टाइल से टूट गई, लॉक डाउन की वजह से पूरे भारत में यह महामारी घातक होते हुए भी है काफी नियंत्रण, लॉक डाउन के दौरान प्रसारित टीवी सीरियल का किया समर्थन 

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पर्दाफाश न्यूज़ टीम
लखनऊ/नई दिल्ली

NDTV के रविश कुमार को अधिवक्ता नागेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने दी तर्कसंगत सलाह देते हुए कहा कि कहा आपके बारे में जो सकारात्मक धारणा बनाई थी वह आप ही के भोजपुरी स्टाइल से टूट गई। उन्होंने सोसल मीडिया के माध्यम से पत्र व्यवहार करते हुए लिखा कि

आदरणीय  रवीश जी(ndtv)
प्रणाम!

हम आपको अक्सर सुनते रहे हैं मगर अफसोस हमने अब तक आपके बारे में जो सकारात्मक धारणा बनाई थी वह आप ही के भोजपुरी स्टाइल से टूट गई। हम आपको काफी प्रबुद्ध व्यक्ति समझते थे क्योंकि अक्सर आप तर्कसंगत बात करते रहे हैं लेकिन आप प्रबुद्ध के बजाय सामान्य बुद्धिजीवी पत्रकार ही निकले। आपको हमने इस बार भोजपुरी में  यह ज्ञान  देते देखा कि आपने सरकार को कहा कि कौन सी जनता आपसे रामायण चलाने को कह रही थी जनता तो भूखे प्यासे सड़क पर घूम रही थी 9:00 बजे दिन में और 9:00 बजे रात में किसके लिए सीरियल चलाया गया।

तो सबसे पहले हम आपसे यह निवेदन करना चाहेंगे की लगभग एक अरब 30 करोड़ की आबादी में एक दो लाख  जनता अगर  मजबूरी या किन्हीं कारणों से संकट में सड़क पर आ गई जबकि कुछ तो उसमें बेवकूफी से आए थे कुछ नासमझी से आए थे कुछ गलतफहमी से आए थे कुछ घबराहट में आए थे कुछ बहकावे में आए थे कुछ जरूरत से ज्यादा चालाकी में आए थे कुछ जरूरत से ज्यादा  अकल मंदी में आए थे i कुछ मूर्खता में आए थे सरकार अपने हिसाब से तो कोशिश कर ही रही थी और कर भी रही है कि किसी को परेशानी ना हो।

अब आप क्या उम्मीद करते हैं की देश के प्रधानमंत्री या किसी राज्य के मुख्यमंत्री प्रतिकूल परिस्थितियों में जब लॉक डाउन है तो वह बॉर्डर पर जनता का पैर पकड़कर रोके और उनको अपने हाथों से चम्मच से खाना खिलाए i और उनसे कहें कि भैया ना जाओ करुणा करोना फैला है रुक जाओ बड़ी कृपा होगी।

जबकि लाख सूचनाओं और प्रचार एवं बंदिशों के बाद भी कोई अपनी जान की परवाह नहीं कर रहा हो। चलिए ठीक है करोना से बहुत से लोग डरे हुए हैं घबराहट भी स्वाभाविक है। लेकिन आपने अपनी बातों को रखने के लिए  रामायण को आधार बनाया रामायण टीवी पर दिखाया जाए महाभारत रामायण और महाभारत टीवी पर फिर से दिखाया जाए इस बात की जनता वर्षों से मांग कर रही थी हम भी चाह रहे थे हम जब छोटे थे तब हमने रामायण और महाभारत देखी थी आज हमारे बच्चे छोटे हैं  हम स्वयं भी चाहते थे की हमारे बच्चे भी रामायण और महाभारत जैसा सीरियल देखें।

अब यह इत्तेफाक है कि इस बीच आजकल करोना आ गया पूरे देश में लॉक डाउन हो गया तो स्कूल बंद है बच्चे घर पर ही हैं तो हर सभ्य व्यक्ति चाहेगा कि घर में बच्चे रामायण महाभारत जैसे धारावाहिकों को देखें सामान्यअनुक्रम में  बच्चों पर पढ़ाई का जोर रहता है दबाव रहता है कभी स्कूल का कभी ट्यूटर का तो मां-बाप भी बच्चों को डांट की कर  जल्दी सुला देते हैं सुबह बच्चे जल्दी स्कूल चले जाते हैं।

अब छुट्टी में इस समय अगर घर के छोटे बच्चे अपना समय रामायण और महाभारत की कहानियां देखने में व्यतीत करते हैं तो हमारा ख्याल है कि आने वाले समय में उनका संस्कार बना रहेगा i उनकी छुट्टियों का सदुपयोग होगा घर में वह संस्कारित चीजों को देखेंगे सीखेंगे जानेंगे समझेंगे और निश्चित ही यह उनके आने वाले जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा

क्योंकि वैसे भी हमारे देश में भारतीय  कल्चर के नाम पर सिर्फ भारतीय एग्रीकल्चर रहा रह गया है। आपने अपने वक्तव्य में कहा की कौन सी जनता चाह रही थी की रामायण दिखाया जाए!

आपने ऐसा कह कर  मधुमक्खी के छत्ते में अपना नंगा हाथ डाल दिया आप कहते हैं कि लोग आपको गाली देते हैं स्वाभाविक सी बात है कि ऐसा होगा। रही बात आपने कहा की सरकार 9 से 10 दिन में और रात को 9:00 से 10:00 रामायण दिखा रही है जबकि उसे कुछ और राष्ट्रहित वाले कार्य करने चाहिए बिल्कुल सही आप कह रहे हैं अगर जो जिम्मेदार हैं वह अपना काम छोड़कर टीवी देख रहे हैं तो यह आपत्तिजनक है हम भी इसका विरोध करते हैं। लेकिन आपको सिर्फ इतना दिखाई दिया कि 9:00 से 10:00 रामायण दिखाई जाती है।

आपको यह नहीं दिखाई दिया कि दिन और रात डॉक्टर और पुलिस जो भी कर सकते हैं अपना बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं।

सरकारी और गैर सरकारी संगठन जो कर सकते हैं वह अपने स्तर पर करने का प्रयास कर रहे हैं। जो अच्छे नेता है वह भी अपने अपने बौद्धिक स्तर से कुछ अच्छा ही करने का प्रयास कर रहे हैं।

अब यह बात अलग है  कि हमारे देश के प्रधानमंत्री  या मुख्यमंत्री  या देश के सभी अधिकारी नेता और  समाजसेवियों का बौद्धिक स्तर आपके बराबर  या समतुल्य नहीं है  इसलिए  वह  आपकी सोच  ऊर्जा   प्रणाली और क्षमता के अनुसार  कार्य नहीं कर पा रहे हैं। 

इसके लिए  हम सभी रामायण देखने वाले नागरिकों की ओर से बच्चों की ओर से खेद प्रकट करते हैं।

लेकिन यह भी निवेदन करेंगे की पूरे भारत में यह महामारी घातक होते हुए भी काफी नियंत्रण में है अगर आपके पास इस बात का वीडियो क्लिप है प्रधानमंत्री जी या कोई मुख्यमंत्री जी या अन्य जिम्मेदार सरकारी अधिकारी 9:00 से 10:00 रामायण देख रहे हैं तो उसका वीडियो आप अपलोड करे। हां यह जरूर है कि अगर उनके घर के बच्चे एक अच्छा सीरियल देख रहे हैं और घर के बड़े अपनी जिम्मेदारियों का अपनी क्षमता अनुसार  निर्वाहन करने का प्रयास कर रहे हैं तो हम समझते हैं इसमें कुछ गलत नहीं है रही बात  छिद्रअन्वेषणकी तो हम आपको एक उदाहरण देते हैं  हमारे हिंदू धर्म में सिर्फ भगवान शंकर के ऊपर दूध चढ़ाया जाता है सिर्फ उनको ही दूध का धुला कहा जा सकता है जहां तक हमें जानकारी है भगवान राम या भगवान कृष्ण की प्रतिमाएं भी दूध से नहीं  धोइ जाती  तो  आपकी  बुद्ध जीविता  के हिसाब से राम और कृष्ण भी दूध के धुले नहीं हैं इस पर आपका क्या कहना है??

तो आप की मानसिकता के हिसाब से तो सब में कुछ ना कुछ कमी निकल आएगी। क्या सरकार कुछ अच्छा भी कर रही है?

हमारा आपसे सिर्फ एक सवाल है जिसे उम्मीद करता हूं कि यदि यह पोस्ट आप तक पहुंचे तो आप इसका उत्तर भी सार्वजनिक रूप से देंगे छोटा सा सवाल है सीधा सवाल है – आपकी नजर में क्या सरकार कुछ अच्छा भी कर रही है या सब गलत ही कर रही है? क्योंकि जहां तक हम समझते हैं अगर सरकार सब कुछ गलत कर रही होती तो आपके बोलने पर भी अब तक प्रतिबंध लगा चुकी होती!

वैसे हमने कहीं पढ़ा था की दो तरह के लोगों को कुछ भी नहीं समझाना चाहिए iiii

पहला विद्वान लोगों को और दूसरा मूर्ख लोगों को। क्योंकि विद्वान लोग आपकी बातें  समझना नहीं चाहेंगे
और मूर्ख समझ नहीं पाएंगे खैर

आपका समय शुभ हो अपना ख्याल रखें…

आपका प्रशंसक-
एडवोकेट नगेंद्र कुमार श्रीवास्तव (गुड्डू भैया)  शोहरतगढ़ सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश
मोबाइल नंबर 98 39 971 975

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