सत्तारूढ़ पार्टियो के नेताओ के रैलियों मे सैकड़ो वाहनों की व्यवस्था करने वाला प्रशासन आखिर मौन क्यो, सबसे बड़ा सवाल?

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पर्दाफाश न्यूज़ टीम
सिद्धार्थनगर

सत्तारूढ़ पार्टियो के नेताओ के रैलियों मे सैकड़ो वाहनों की व्यवस्था करने वाले प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट देवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि 20 से 30 किमी दूरी तय कर अपने घरों तक पहुचने को वेबस लोगो को देख कर अत्यंत दुख हुवा। विगत चार दिनों से भूखे प्यासे अन्य प्रदेश से आये जनपद वासियों को जांचोपरांत पैदल घर जाने हेतु प्रशासनिक/जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा छोड़ दिया जाना यह दर्शाता है कि इन अधिकारियों के अंदर मानवता नाम की चीज सायद शेष नही बची है।

झुंडों में बांसी से इटवा, मोहनकोला, चेतिया, बहराइच आदि स्थानों पर जानेवाले इन राहगीरों को रुधौली के नजदीक जनपद में प्रवेश करने के उपरांत जांच कराए जाने के बाद पैदल ही जाने को छोड़ दिया गया जबकि यह सभी विगत तीन दिनों से भूखे प्यासे थे। सवाल उठता है यही जिम्मेदार लोग जब सत्तारूढ़ पार्टियो की रैलियों का आयोजन होता है तो भीड़ जुटाने के लिए दर्जनों ही नही अपितु सैकड़ो वाहन लोगो की सेवा में प्रस्तुत कर देते वही आज ऐसे बेबस लोगो के लिए एक साधन अगर कहे एक वाहन तक उपलब्ध नही करा सकते। शर्म आती है ऐसे प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर। इतनी छोटी छोटी व्यवस्था करने में यह जिम्मेदार यदि असमर्थ पा रहे है तो बड़े व्यवस्थाओ के बारे में क्या अपेक्षा करे।

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