राजेश त्रिपाठी (पूर्व मंत्री उ.प्र. शासन चिल्लूपार-गोरखपुर) ने होली की दी बधाई, रचना से की होली अभिव्यक्ति

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होली पर हमारी नयी रचना के साथ… आप सभी के जीवन में खुशियों के सारे रंग खिल जाने की कामना….

गर हो गयी चौड़ी उसकी ‘को’ली… तो होली
गर बनी मकान उसकी ‘खो’ली …तो होली
गर हम नहीं देते किसी को ‘गो’ली… तो होली
गर हमने कान में ना जहर ‘घो’ली… तो होली
गर हर जीवन में बना (र) ‘ङो’ली.. तो होली
गर बचे निहारने से अंगिया ‘चो’ली… तो होली
गर न की तूने हरकतें (छि)’छो’ली…तो होली
गर रहे बने आपस में हम ‘जो’ली… तो होली
गर न दें हम किसी को ‘झो’ली… तो होली
गर दुखों को हमने बस ‘ञों’ली… तो होली
गर बनी है हमारी अपनी ‘टो’ली… तो होली
गर दुखों में भी जारी है (ठि)’ठो’ली…तो होली
गर उठी तेरी वजह से कोई ‘डो’ली…तो होली
गर बाजे तेरी वजह नगाड़े ‘ढ़ो’ली… तो होली
गर आदत नहीं है तेरी (हिं)’ड़ोली’… तो होली
गर बोलने से पहले जुबाँ है ‘तो’ली ..तो होली
गर नहीं है की किसी से (ढिं)’थो’ली..तो होली
गर कूबत है तो जमा दूब (ग)’दो’ली..तो होली
गर बहती गंगा में हाथ न ‘धो’ली..तो होली
गर बिगड़े रिश्ते हमने (ब) ‘नो’ली..तो होली
गर नहीं है पैर की जमीं ‘पो’ली…तो होली
गर नहीं जला, न पड़ा (फँ)’ फो’ली..तो होली
गर नहीं है हमारी कड़वी ‘बो’ली.. तो होली
गर आचरण हमारा भाली ‘भो’ली..तो होली
गर रिश्ते निभा बन (चन्द्र) ‘मो’ली..तो होली
गर नहीं पकाते पुलाव (ख)’यो’ली..तो होली
गर जीवन में है कुमकुम ‘रो’ली..तो होली
गर न करें गैर जरूरी बक ‘लो’ली..तो होली
गर न बोलें किसी को (टि)’वोली…तो होली
गर जला रखी सच की (म)’शोली’..तो होली
गर न उड़ाई किसी की (म)’षो’ली.. तो होली
गर है हमारे संग टीम (हँ)’सो’ली…तो होली
गर प्यार के रंग से खेली ‘हो’ली… तो होली
गर न किया हरकतें (रि)’क्षो’ली… तो होली
गर न की ऐसी बात हो जा ‘त्रो’ली… तो होली
गर इश्क़ेवतन से चादर (भि)’ज्ञो’ली..तो होली

राजेश त्रिपाठी
पूर्व मंत्री उप्र शासन
चिल्लूपार-गोरखपुर

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