जनता के भावनाओं व मत का अनादर करने वाले जनप्रतिनिधों के विरुद्ध कार्यवाही के प्रावधान की अनिवार्यता प्रासंगिक

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भारतीय संविधान दिवस पर विशेष
जनता की भावनाओ का अनादर करने वाले जनप्रतिनिधियों पर नियंत्रण हेतु विशेष उपबन्ध की अनिवार्यता। —आर0के0 पाण्डेय

पर्दाफ़ाश न्यूज टीम

प्रयागराज
भारतीय संविधान दिवस के अवसर पर एनजीओ परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी की बैठक में इसके प्रबन्धक आर0के0 पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान लागू हुआ था जिसके उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 26 नवम्बर को हम भारतीय संविधान दिवस मनाते हैं। 70 साल बीत जाने पर इस प्रसन्नता के अवसर पर भी यह विचारणीय हो जाता है कि क्या भारतीय संविधान का वास्तविक लाभ जनता को मिल रहा है अथवा यह जनप्रतिनिधियों के लिए चारागाह बना हुआ है।
भारतीय संविधान दिसव के अवसर पर आज प्रयागराज में एनजीओ परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी की एक बैठक में इसके प्रबन्धक आर0के0 पाण्डेय एडवोकेट ने बताया कि वास्तव में भारतीय संविधान का मूल उद्देश्य समता, स्वतंत्रता व विकास के रास्ते पर चलकर जनता का विकास करना था परन्तु 70 वर्ष के बाद भी जनता उपेक्षित व ठगी ही प्रतीत होती है। संविधान की आड़ में देश की अधिकांश योजनाएं अब जनता के बजाय अकर्मण्य लोगो व जनप्रतिनिधियों की पोषक व वाहक बन गई हैं। अन्न उत्पादक संकट में है परन्तु उसे बिजली, पानी व खाद तक फ्री नहो है बल्कि सब्सिडी का लाभ लेकर करोड़ों लोग गलत फायदे उठा रहे हैं। स्टेट बोर्ड, सीबीएसई, उर्दू, संस्कृत, आईसीएसई आदि दर्जनों बोर्ड व जमीन आसमान जैसी भयानक अंतर वाली फीस के तले शिक्षा में असमानता है तो आरक्षण के आड़ में करोड़पति व अयोग्य को भी प्रतिभावान योग्य नवयुवकों का गला दबाकर गलत फायदे दिए जा रहे हैं। निर्धन, बेसहारा व पात्र आम जनता अभी भी फ्री यात्रा, चिकित्सा, शिक्षा से महरूम है तो अरबों की सम्पत्ति के मालिक बड़े नेताओं को उपरोक्त सुविधाएं निःशुल्क मिलती हैं। हास्यास्पद तो यह है कि स्वयं को जनता का सेवक बताने वाले नेता इतने डरपोक है कि उनके सुरक्षा के नाम पर अरबों रुपये बहाए जाते है जबकि जनता के मोहल्लों व गांवों में एक सुरक्षा गार्ड तक नही है। यक्ष प्रश्न तो यह है कि चुनाव जीतने के बाद राजनैतिक दल व जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों व अपने एजेंडे को तिलांजलि देकर विपरीत विचारधारा के साथ मिलकर व्यक्तिगत हित व कुर्सी के लाभ के लिए सरकार बना लेते हैं। कमियां तो लाखों है लेकिन उनपर रोने के बजाय सुधार की जरूरत है। आज सबसे बड़ी जरूरत है कि संविधान में ऐसे उपबन्ध जोड़े जाएं जो जनता को धोखा देकर व अपने लिखित एजेंडे से परे जाकर व्यक्तिगत लाभ व कुर्सी के चक्कर मे गठजोड़ करने वाले राजनैतिक दलों व जनप्रतिनिधियों पर तत्काल अंकुश लगा सकें। इस अवसर पर इंदुमती देवी पाण्डेय, मनीषा पाण्डेय, अनिल कुमार, जगदीश प्रसाद, विनय कुमार द्विवेदी, नीलमणि, अजय, राजीव, वेदांश, दिव्या व निधि आदि दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

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