प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर मिट्टी स्नान का आयोजन

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
नैनी ( प्रयागराज )

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर बृजलाल मेमोरियल सेवा समिति के बैनर तले पूजा आरोग्य केंद्र एवं प्रजापति आरोग्य केंद्र द्वारा आयोजित मिट्टी चिकित्सा एवं सामूहिक मिट्टी स्नान का आयोजन महेवा घाट पर हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण से प्रारंभ होकर सभी अतिथियों का अंग वस्त्र एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया। पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी डॉ रमेश चंद्र ने मिट्टी चिकित्सा पर आधारित अपने व्याख्यान में कहा महात्मा गांधी स्वयं एक प्राकृतिक चिकित्सक थे और वे अपना जीवन प्राकृतिक रूप से जिया करते थे उन्होंने अपनी समस्त बीमारियों को इस विधा से दूर किया और 18 नवंबर को उरली कांचन में अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद् की नीव डाली जो आज पल्लवित होकर 100 बेड का हॉस्पिटल बन चुका है। मिट्टी ताप शोधक, रक्तशोधक,, कब्ज नाशक एवं शरीर के समस्त विकारों को दूर करने वाली है। डॉ टी एन पांडे ने पंच तत्वों के ऊपर अपना व्याख्यान दिया। लखनऊ से आए डॉ संजीव पांडे ने योग की महत्वता एवं योग से शरीर के अंगों में पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताया और का योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एक स्वस्थ जीवन जीने की शैली है। मुख्य अतिथि आज के द्रोणाचार्य के रूप में वरिष्ठ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉक्टर सिया प्रताप सिंह जी ने प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित तमाम रोगों के ऊपर चर्चा की और बताया की मिट्टी पानी धूप हवा और आकाश से कैसे चिकित्सा की जाती है और शरीर पर उसके क्या प्रभाव पड़ते हैं। वैष्णवी आरोग्यं की निर्देशिका डॉ सुषमा खेतान ने एलोपैथिक चिकित्सक होने के बावजूद इस चिकित्सा पद्धति को अपनाने के लिए लोगों का आह्वान किया। आयोजन में लगभग 200 से अधिक लोग उपस्थित थे। इस आयोजन में पहले मिट्टी लेप लगाकर सूर्य स्नान कराया गया तत्पश्चात यमुना नदी में स्नान कराया गया सभी स्त्री-पुरुष बच्चों ने जमकर इसका लाभ उठाया और आनंद लिया। इस चिकित्सा पद्धति को लोगों ने अपने जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया। डॉक्टर सूर्यनाथ प्रजापति ने अंत में आए हुए लोगों का आभार प्रकट किया और सभी को बधाई दी। इस आयोजन में मुख्य रूप से श्रीमती सरिता पटेल, पूनम वर्मा , पूजा , साक्षी, तनु ,श्रुति, रीना वीरेन आ जाए मनीष मंतोष इंद्रभान सूर्या यादव पवन आदि लोग उपस्थित थे।