श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस – राघव जी ने मानसिक पूजा को बताया सर्वश्रेष्ठ

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पर्दाफाश न्यूज टीम
फतेहपुर/लखनऊ

विकास खण्ड अमौली के ग्राम डिघरूवा के श्री बाँके बिहारी मन्दिर में संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा चल रही है। आज कथा के पंचम दिवस में श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गुंजायमान हो गया। राधे-राधे के उद्घोष से माहौल भक्ति के रस में डूब गया।इसके बाद मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों द्वारा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। भगवताचार्य राघव जी महाराज ने बताया श्रीमद्भागवत कथा पांच लोगों को सुनाई जा रही है सूत जी महाराज शौनक आदि ऋषियों को शुखदेव महाराज परिक्षित को गोकर्ण जी महाराज धुन्धकारी नारद जी महाराज सनकादिक को तथा पांचवा स्वयं यह दास आप सभी को कथा सुना रहा है।

राघव जी महाराज गज और ग्राह की कथा को विस्तार से समझाया ।सौ हजार हाथियों का बल रखने वाले गज का पैर सरोवर में ग्राह मगरमच्छ ने पकड़ रखा था।। बहुत कोशिशों के वावजूद गज अपना पैर नही छूटा पाया और फिर अंत मे स्वयं प्रभु को पुकारने पर ग्राह का उद्धार कर गज के प्राणों की रक्षा की । गज ने प्रभु से प्रश्न किया आपको मैंने पुकारा पर आपने पहले ग्राह का उद्धार किया। प्रभु ने बताया जो मेरे भक्त का पैर पकड़ लेता है उसका उद्धार मैं पहले करता हूं। राघव जी महाराज ने सभी पूजाओं में मानसिक पूजा को सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने बताया श्रीमद्भागवत महापुराण कोई साधारण कथा नही है शुखदेव जी महाराज ने परीक्षित को बिना कुछ खाए पिए लगातार सात दिन कथा सुनाई थी।।न अब कोई शुखदेव जी जैसा सुनाने वाला है और न परीक्षित जी जैसा कोई सुनने वाला। सुर नर मुनि सब की यह रीति, स्वार्थ लागि करै सब प्रीति।
राघव जी महाराज ने देवताओं व राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन के प्रसंग की विस्तार से चर्चा किया ।। जिसमे मन्दराचल पर्वत पर अत्यंत जहरीले सर्प वाशुकी को मथने के लिए रस्सी की जगह प्रयोग किया गया। मंथन के दौरान हालाहल विष निकला जिसको स्वयं भगवान शंकर को पीना पडा जिससे कंठ नीला पड़ने के कारण भगवान शंकर का नाम नीलकंठ पड़ा ।
राघव जी महाराज ने शंकराचार्य के शिष्य दानवराज बलि के वामन भगवान द्वारा दान में 3 डग की भूमि मे सम्पूर्ण ब्रह्मांड को नाप लिया था।। बलि द्वारा दिये के दान से प्रसन्न होकर बलि को पाताल लोक का राजा बनाकर स्वयं बलि के 52 बावन दरवाजो पर द्वारपाल बन कर खड़े रहे। आवत हिय हरसे नही, नैनन नही स्नेह। तुलसी वहाँ न जाईये, चाहे कंचन बरसे मेंघ
तुलसी दास जी कहते है व्यकित को जहाँ प्रेम नही है वहाँ नही जाना चाहिए । चाहे वहाँ बदलो से सोने की बारिश क्यो न हो रही हो। विदुरानी के श्रीकृष्ण भगवान के प्रति सेवा भाव की चर्चा की। किस प्रेम में बिभोर होकर विदुरानी द्वारा दिए गए केले के छिलके को बहुत ही प्रेम से भगवान कहा रहे है । और विदुरानी केले को बाहर फेंक रही है। राघव जी महाराज ने बताया कि परमात्मा से प्रेम करना सीखिए तभी परमात्मा होंगे। राघव जी महाराज ने एकादशी के व्रत के महत्व पर विस्तार से चर्चा किया। कथा सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गएद्यभजन,गीत व संगीत पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे।परीक्षित राजेश अवस्थी अपनी धर्मपत्नी ममता अवस्थी के साथ कथा का श्रवण कर रहे है। वृन्दावन से पधारे आचार्य पुष्पेंद्र चतुर्वेदी ने भी कथा में शिरकत की। संगीताचार्य के रूप में ऑर्गन में कृष्णा तिवारी तबले पर अनुपम व पैड पर शैलेन्द्र से मधुर संगीत ध्वनि दे रहे है। राघव जी महाराज के कम उम्र में उच्चकोटि की कथा वाचन शैली की चर्चा पूरे क्षेत्र में फैल रखी है। श्रीमद्भागवत कथा की संगीतमयी प्रस्तुति से सभी भक्तगण भावविभोर व आनंदित होकर अपने जीवन कृतार्थ कर रहे है । कथा सुनने के लिए आसपास के गांवों से भारी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं। आज कथा का श्रवण करने आचार्य राघव जी महाराज के माता-पिता आयेद्यजिनका मंच पर आयोजको द्रारा विशेष सम्मान किया गया। भागवत कथा में पवन अवस्थी, अमित दीक्षित (प्रधान जद्ददुपुर) अंकित दीक्षित, सर्वेश अवस्थी, गोलू पाण्डेय, शौर्य पाण्डेय, राजेश शुक्ला, कृपाशंकर शुक्ला, कमलेश दुबे, रामआसरे शुक्ला, भरतलाल तिवारी, बीरेंद्र दीक्षित, राममोहन शुक्ला, रमेश अवस्थी, सोमेश्वर उमराव, कैलाश शुक्ला बाल्मीकि बाजपेई, कमलेश उमराव, अनूप शुक्ला, गुलाब कुशवाहा, राजू दुबे, अवनीश दुबे, पुत्ती लाल मिश्रा आदि रहे।

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