कबीर हत्याकांड- 8 दिन पूर्व कोतवाल बने ठाकुर शमशेर बहादुर सिंह बने बलि का बकरा, वर्चस्व की लड़ाई में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार व इन्सपेक्टर शमशेर बहादुर सिंह का तबादला बना चर्चा की विषय

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पर्दाफाश न्यूज टीम
बस्ती/लखनऊ

मिली जानकारी के मुताबिक लगभग 8 दिन पूर्व बस्ती के शहर कोतवाल बने ठाकुर शमशेर बहादुर सिंह का स्थानांतरण महज बस्ती में चल रहे ठाकुरों और ब्राह्मणों के वर्चस्व की लड़ाई में सीबीसीआईडी लखनऊ के लिए कर दिया गया है और इन्सपेक्टर शमशेर बहादुर सिंह के स्थानांतरण को बस्ती के ब्राह्मण अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं।

कुछ दिन पूर्व इन्सपेक्टर शमशेर बहादुर सिंह जनपद बस्ती के परसरामपुर के कोतवाल थे और परसरामपुर में रहते हुए इन्सपेक्टर शमशेर बहादुर सिंह ने अपराधियों का सुनियोजित ढंग से सफाया किया एवं पूरे क्षेत्र को भयमुक्त वातावरण दिया इसी बात से खुश होकर और शमशेर बहादुर सिंह की जबरदस्त पुलिसिंग को देखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार ने शमशेर बहादुर सिंह को बस्ती नगर कोतवाली का शहर कोतवाल नियुक्त किया अभी बस्ती शहर कोतवाल बने हुए श्री शमशेर बहादुर सिंह को 1 सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ था कि शहर में कबीर हत्याकांड प्रकरण को लेकर उपद्रव शुरू हो गया। इस उपद्रव की सूचना पाते ही बस्ती के अपर पुलिस अधीक्षक सहित तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए एवं स्थिति को देखने लगे उपद्रव बढ़ने लगा शहर कोतवाल बस्ती शमशेर बहादुर सिंह ने पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार के कड़े निर्देशों एवं मार्गदर्शन में पूरी ताकत लगाकर उपसर्ग रोकने का प्रयास किया परंतु उन्हें अधिकारियों से समुचित निर्देश न मिलने के कारण उपद्रव बढ़ता गया क्योंकि शमशेर बहादुर सिंह बस्ती के नए-नए कोतवाल बने थे उन्हें बस्ती के बारे में अधिक जानकारी भी नहीं थी और घटनास्थल पर सभी जानकार वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे वह भी कुछ नहीं कर पा रहे थे फिर शहर कोतवाल बस्ती जिन्हें सिर्फ एक हफ्ता ही आए हुए बीता था वह अकेले क्या कर पाते। बतातें है कि कबीर हत्याकांड प्रकरण को ब्राह्मण वर्चस्व और ठाकुर वर्चस्व ने रूप ले लिया इस पूरी घटना का संज्ञान उत्तर प्रदेश शासन ने लिया और उत्तर प्रदेश शासन की ओर से एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जांच करने बस्ती पहुंचे उन्होंने भी अपनी रिपोर्ट में बेगुनाह शहर कोतवाल बस्ती शमशेर बहादुर सिंह लपेट दिया और इसी कारण शमशेर बहादुर सिंह एवं बस्ती के पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार का स्थानांतरण कर दिया गया।

लोग बतातें है कि गलती लखनऊ से आए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी महोदय की नहीं है उन पर ब्राह्मण वर्चस्व के नेताओं ने जबरदस्त दबाव बनाया और इंस्पेक्टर पुलिस शमशेर बहादुर सिंह पर गाज गिर गई पूरे उत्तर प्रदेश में अपने सराहनीय कार्य प्रणाली एवं बेहतर पुलिसिंग के लिए मशहूर पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार एवं शमशेर बहादुर सिंह की कोई गलती नहीं थी फिर भी उन पर गाज गिर गई और लोकप्रिय पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार को पुलिस महानिदेशक कार्यालय से संबंध एवं शमशेर बहादुर सिंह का स्थानांतरण सीबीसीआईडी कर दिया गया।
इस प्रकरण में शमशेर बहादुर सिंह केवल ब्राह्मण एवं ठाकुरों की वर्चस्व की लड़ाई के भेंट चढ़ गए वास्तविकता तो यह है कि पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार किसी का भी अनावश्यक दबाव नहीं मान रहे थे और संपूर्ण पारदर्शिता के साथ बस्ती में बेहतर पुलिसिंग करा रहे थे एवं अपराधियों को पकड़ पा रहे थे लगातार जनपद बस्ती की आम जनता सीधे उनसे मिल रही थी ऐसे में नेताओं को लगा कि उनकी राजनीति खतरे में आ गई है बस फिर क्या था अधिकतर नेताओं ने गोल बनाकर पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार का भी स्थानांतरण करा दिया और उनके साथ साथ इंस्पेक्टर कोतवाली बस्ती शमशेर बहादुर सिंह का भी तबादला करा दिया गया जबकि शमशेर बहादुर सिंह के तबादले का कोई औचित्य नहीं था और शमशेर बहादुर सिंह का तबादला किसी भी सूरत में न्याय संगत नहीं कहा जा सकता पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार एवं श्री शमशेर बहादुर सिंह के तबादले से पूरा जनपद बस्ती दुखी है और सभी उनके तबादले की जोरदार निंदा कर रहे हैं क्योंकि पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार एवं शहर कोतवाल बस्ती शमशेर बहादुर सिंह पर बेगुनाह होते हुए भी तबादले की गाज गिरी है जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं है इंस्पेक्टर पुलिस शमशेर बहादुर सिंह को अगर एक महीना भी बस्ती का कोतवाल बने हुए होता तो उन्हें दोषी माना जा सकता था परंतु 1 सप्ताह पूर्व ही बस्ती के शहर कोतवाल बने श्री शमशेर बहादुर सिंह को कैसे दोषी माना जा सकता है सभी जानते हैं कि बस्ती के नए कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह जातीयता के विरुद्ध और शमशेर बहादुर सिंह ने बस्ती में भी ठाकुरों को और ब्राह्मणों को भी बिना किसी भेदभाव के पारदर्शिता के आधार पर सम्मान दिया है। परंतु दोष ना होते हुए भी केवल इसलिए तबादला कर दिया जाए कि शमशेर बहादुर सिंह ठाकुर जाति से हैं क्षत्रिय हैं यह कतई भी उचित नहीं है क्योंकि पुलिस में रहते हुए सभी समान होते हैं किसी को भी किसी जाति से आंकना उचित नहीं है इंस्पेक्टर पुलिस श्री शमशेर बहादुर सिंह के तबादले से बस्ती के लोग बेहद दुखी हैं और श्री शमशेर बहादुर सिंह के तबादले से ठाकुर ही नहीं ब्राह्मण जाति के अधिकतर लोग दुखी हैं सभी का मानना है कि श्री शमशेर बहादुर सिंह निष्पक्ष रुप से बेहतर पुलिसिंग करते हैं परंतु बस्ती में ब्राह्मणों और ठाकुरों के वर्चस्व की लड़ाई में बेगुनाह होते हुए भी शमशेर बहादुर सिंह पर गाज गिर गई जिसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है जिस समय शमशेर बहादुर सिंह परसरामपुर के कोतवाल थे उस समय वहां पर मोहर्रम को लेकर काफी बवाल हो गया था परंतु पुलिस अधीक्षक बस्ती श्री पंकज कुमार के कड़े निर्देशों एवं मार्गदर्शन में शमशेर बहादुर सिंह ने जबरदस्त परिश्रम करते हुए मामला शांत किया और कानून एवं व्यवस्था को मजबूत किया जिसकी प्रशंसा परशुरामपुर की जनता आज भी करती है अभी है तो सरकार का निर्णय है सरकार को इस प्रकरण में एक बार फिर जांच करानी चाहिए और निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि बेगुनाह इंस्पेक्टर पुलिस शमशेर बहादुर सिंह को न्याय मिल सके अन्यथा उत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारियों का मनोबल गिर जाएगा जो उचित नहीं है बस्ती के पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार का ट्रांसफर भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है क्योंकि जनसुनवाई में पंकज कुमार ने जनपद बस्ती की आम जनता का दिल जीत लिया था और जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की थी आम जनता में क्या अच्छी मेहनत करने का क्या बेहतर पुलिसिंग करने का उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार को और इंस्पेक्टर पुलिस बस्ती शमशेर बहादुर सिंह को यही इनाम दिया है यह आम जनता पचा नहीं पा रही है पुलिस अधीक्षक बस्ती पंकज कुमार एवं इंस्पेक्टर कोतवाली बस्ती शमशेर बहादुर सिंह के स्थानांतरण का विरोध बस्ती के समाचार पत्रों में भी छपा है ट्यूटर फेसबुक आदि पर भी पुलिस अधिकारी जबरदस्त टिप्पणी कर रहे हैं एवं सभी पुलिस अधिकारी बस्ती के पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार एवं पुलिस इंस्पेक्टर शमशेर बहादुर सिंह के स्थानांतरण का जोरदार विरोध कर रहे हैं अपनी अपनी टिप्पणी में यूपी पुलिस के अधिकारी एवं इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी एवं पुलिसकर्मी यह टिप्पणी कर रहे हैं कि अगर इसी प्रकार ट्रांसफर होते रहे तो पुलिस का मनोबल टूट जाएगा अब देखना यह है कि इस और उत्तर प्रदेश सरकार का क्या बेहतर रुख होगा और क्या इन पुलिस अधिकारियों को न्याय मिलेगा अथवा नहीं या इनका मनोबल टूट जाएगा यह तो आगे आने वाला समय ही बताएगा जहां तक जनपद बस्ती के लोकप्रिय पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार के स्थानांतरण का प्रश्न है इसके पीछे बहुत ही बड़ा राजनीतिक और भीतरी घात के जबरदस्त षड्यंत्र की ओर सीधा संकेत करता है।

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