श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस, कथा में बही भक्ति की बयार

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पर्दाफाश न्यूज़ टीम
फतेहपुर/लखनऊ

विकास खण्ड अमौली के ग्राम डिघरूवा के श्री बाँके बिहारी मन्दिर में संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा चल रही है। आज कथा के चतुर्थ दिवस में श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गुंजायमान हो गया। राधे-राधे के उद्घोष से माहौल भक्ति के रस में डूब गया।इसके बाद मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों द्वारा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की।

भगवताचार्य राघव जी महाराज ने मनु महाराज उत्तानपाद ध्रुव प्रहलाद की कथाओं की विस्तार से चर्चा किया।मनु महाराज के पुत्र प्रियव्रत व उत्तानपाद के बारे में दृष्टांत को लेते हुए चरित्र के बारे में विस्तार से कथा सुनाई। बिना दक्षिणा के यज्ञ पूरा नही होता हैमाता अनुसुइया के यह ब्रह्मा विष्णु और शंकर पुत्र बनकर आये की कथा को विस्तार से चर्चा किया । विष्णु के अंश से दत्तात्रेय ब्रह्मा के अंश से दुर्वासा तथा भगवान शंकर के अंश से सोम चंद्रमा उत्पन्न हुए । प्रजापति दक्ष के यहाँ चल चल यज्ञ में पिता के द्वारा आमंत्रण आ दिए जाने के बावजूद तथा भगवान भोले शंकर के बार बार मना करने पर भी माँ सती अपने पिता के यह गई। वहाँ समाज मे अपने पति का आसन न पाकर पति के अपमान को सह न पाई और स्वयं यज्ञकुंड में समाहित होकर प्राण त्याग दिये । भरत जी महाराज के चरित्र के बारे में विस्तार से चर्चा किया।। भरत जी महाराज की सादगी व प्रभु अनुराग के चलते प्रभु ने उन्हें दर्शन दिया। जब तक शरीर मे समर्थ है जप तप नियम और संयम कर लेना चाहिये।
उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव के चरित्र के बारे में विस्तार से मार्मिक चर्चा किया । ध्रुव मात्र 4 वर्ष 6 माह की आयु में घर छोङकर वन में तपस्या करने चले गए।। ध्रुव की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु ने उन्हें दर्शन दिए।।गुरु निधि भव निधि तरिय न कोई जो विरंचि शंकर सम होई । गुरु के बिना इस भव सागर से पार नही किया जा सकता है चाहे उसमे भगवान शंकर क्यो न हो।।

हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद के चरित्र के बारे में विस्तार से चर्चा की। प्रभु के प्रति अनुराग के कारण अपने पिता की बात न मानकर वह प्रभु गुणनुवाद में मगन रहा।। तमाम प्रतारणाओ पहाड़ो के फिकवाने बुआ होलिका के द्वारा आग मे जलवाने बावजूद वह ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जा जाप करते हुए बचता रहा।।अंत ने स्वयं भगवान नरसिंह अवतार के रूप में आकर हिरण्यकश्यप का वध करके प्रहलाद को दर्शन दिए।।

कथा सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए|भजन,गीत व संगीत पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे।परीक्षित राजेश अवस्थी अपनी धर्मपत्नी ममता अवस्थी के साथ कथा का श्रवण कर रहे है। वृन्दावन से पधारे आचार्य पुष्पेंद्र चतुर्वेदी ने भी कथा में शिरकत की। संगीताचार्य के रूप में ऑर्गन में कृष्णा तिवारी तबले पर अनुपम व पैड पर शैलेन्द्र से मधुर संगीत ध्वनि दे रहे है। आसपास के गांव से सैकड़ो लोग कथा सुनने के लिए पहुँच रहे है।कम उम्र में इतनी मधुरवाणी व संगीतमयी कथा सुनकर भागवताचार्य जी की लोग तारीफ कर रहे है व क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आज भगवत कथा में अमर जीत सिंह जनसेवक (पूर्व शिक्षा मंत्री) जी का भी आगमन हुआ|जनसेवक जी ने कथा का श्रवण किया|और मंच से भक्तगणों को सम्बोधित करते हुए बोले,कि भगवत कथा सुनने भर से जीवन का कल्याण नही होता है|भगवत कथा के उत्तम चरितों का अनुशरण भी अपने जीवन मे करना आवश्यक है|जब हम उत्तम चरितों का अनुशरण करेंगे|तभी मोक्ष्य की प्राप्ति होगी|

भागवत कथा में पवन अवस्थी, अंकित दीक्षित,सर्वेश अवस्थी,शुभम मिश्रा,गोलू पाण्डेय,शौर्य पाण्डेय,कमलेश तिवारी,रामआसरे शुक्ला,भरतलाल तिवारी,बीरेंद्र दीक्षित,राममोहन शुक्ला,रमेश अवस्थी,सोमेश्वर उमराव,कैलाश शुक्ला बाल्मीकि बाजपेई,कमलेश उमराव,रामविशाल कुशवाहा,पुत्ती लाल मिश्रा मुन्ना तिवारी आदि रहे|

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