हानिकारक प्लास्टिक से पर्यावरण संरक्षण पर शुआट्स, हुआ कार्यशाला का आयोजन

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

सैम हिग्गिनबाॅटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय में निदेशालय शोध एवं काॅलेज आॅफ फारेस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में ‘एक बार प्लास्टिक उपयोग प्रतिबंध-जीवन एवं पर्यावरण संरक्षण’ पर एक कार्यशाला आयोजित हुई जिसमें वैज्ञानिकों द्वारा एक बार प्रयोग हुए प्लास्टिक के पर्यावरण पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव, एकल प्लास्टिक के उपयोग का कृषि पर प्रभाव आदि विषयों पर तकनीकी सुझाव दिया गया।
मुख्य अतिथि प्रति कुलपति (प्रशासन) प्रो0 (डा.) एस.बी. लाल थे जिन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिये गये एक बार प्रयोग हुए प्लास्टिक को 2 अक्टूबर से त्यागने के संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि शुआट्स इस जनकल्याण के कार्य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य की सफलता के लिए सभी से सहयोग देने की अपील की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक से होने वाले दुष्प्रभाव का आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस हानिकारक प्लास्टिक से जल स्रोत गंभीर रूप से दूषित हो रहे हैं, मृदा स्वास्थ्य खराब हो रहा है, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, गायों के पेट में भारी मात्रा में प्लास्टिक निकल रहा है। यदि समय रहते हम नहीं जागे तो आने वाली जेनरेशन को दूषित पर्यावरण एवं अस्वस्थ जीवन का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस आवाहन को विश्वव्यापी आन्दोलन की संज्ञा देते हुए हानिकारक प्लास्टिक का उपयोग छोड़ने के सुझाव भी दिये। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि माननीय सांसद डा. रीता बहुगुणा जोशी जी थीं जिन्होंने दूरभाष पर सूचित किया है कि वे स्वयं पर्यावरण प्रेमी हैं किन्तु अति आवश्यक आकस्मिक कार्य से लखनऊ जाना पड़ा इसलिए वे चाहकर भी कार्यक्रम में भी नही आ सके।

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