🌅 हिमालय केवल एक पहाड़ नहीं बल्कि वह तो भारत का रक्षक, संरक्षक और पिता है – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

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🛑 हिमालय है तो हम है

🔴 हिमालय के लिये लेना होगा हिमालय सा संकल्प

परमार्थ निकेतन में हिमालय दिवस के एक दिन पूर्व हिमालय के संरक्षण के लिये हिमालय सा संकल्प लिया गया। भारत सहित विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, दिल्ली से आये रसायनी बाबा, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी और फ्रांस से आये यूनिसेफ इंडिया वास चीफ निकोलस ओसबर्ट के पावन सान्निध्य में हिमालय संरक्षण का संकल्प लिया।
हिमालय दिवस के एक दिन पूर्व स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हिमालय है तो हम है; हिमालय है तो गंगा है और हिमालय है तो नदियाँ है परन्तु धीरे-धीरे हिमालय की वनस्पतियाँ और जड़ी बूटियाँ समाप्त होते जा रही है उसे बचाये रखने के लिये हम सभी को संकल्प लेना होगा।
स्वामी जी ने कहा कि हमें तो यह भी प्रयास करना चाहिये कि हिमालय की तरह हमारा पूरा देश हरा-भरा हो इसलिये हमें वृहद स्तर पर वृक्षारोपण करना होगा, जल का संरक्षण करना होगा तथा जल और वायु को प्रदूषण से मुक्त करना होगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने हिमालय को संरक्षित करने तथा हिमालय के ईको सिस्टम को बनायें रखने का आह्वान करते हुये कहा कि हम सभी को हिमालय के ईको सिस्टम को डेवलप करने के लिये जमीनी स्तर पर प्रयास करने होंगे और इसके लिये हमें आज से ही छोटे-छोटे कदम उठाने होंगे। यथा एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग बंद करें, नदियों में गिरते नालों को टैप करना, कचरे-कूड़े का उचित प्रबंधन, निर्माण कार्य सतत विकास पर आधारित हो इस पर जोर देना होगा। उन्होने कहा कि हिमालय केवल एक पहाड़ नहीं बल्कि वह तो भारत का रक्षक, संरक्षक और पिता है। हिमालय केवल पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को ही जीवन प्रदान नहीं करता बल्कि अमेजान जंगल के बाद हिमालय ही दुनिया को शुद्व प्राणवायु देने वाला दूसरा बड़ा स्रोत है तथा भारत में बहने वाली 11 प्रमुख नदियां हिमालय से ही निकलती है। हिमालय भारत के 65 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझाने का माध्यम है। हिमालय से प्राप्त अमूल्य वन सम्पदा और जड़ी-बूटी किसी न किसी रूप से विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। हिमालय भारत ही नहीं विश्व को भी प्राणवान और प्राणवायु आॅक्सीजन प्रदान कर ऊर्जावान बना रहा है। अतः हमें यह समझना होगा की हिमालय है तो हम है। हिमालय हमारा रखवाला ही नहीं प्राणदाता और जीवनदाता भी है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वृक्षारोपण और एकल उपयोेग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया। सभी ने स्वामी जी के साथ संकल्प को दोहराया कि ’’हिमालय हमारे देश का मस्तक है, विराट पर्वतराज दुनिया के बड़े भू-भाग के लिये जलवायु, जल जीवन और पर्यावरण का आधार है। इसके गगन चुंबी शिखर हमें नई ऊँचाई छूने की प्रेरणा देते है अतः हम हिमालय की रक्षा के लिये हर सम्भव प्रयत्न करेंगे तथा अपनी ओर से कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे हिमालय को नुकसान पहुंचे’’। उन्होने कहा कि संकल्प से ही सिद्धि होती है। हमें स्वच्छता, स्वास्थ्य और समृद्धि की त्रिवेणी को बनाये रखने के लिये हिमालय सा संकल्प लेना होगा। स्वामी जी के पावन सान्निध्य में सभी ने मिलकर विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।
इस अवसर पर फ्रांस से आये यूनिसेफ इंडिया वास चीफ निकोलस ओसबर्ट, एंटोनी ओसबर्ट, औरेलीन मार्टिन, पेडों और भारतीय संस्कृति को समर्पित यूनाइटेड किंगडम से आया परिवार डेविड, इवा लुकास, कमला, जाहृवी, स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती, सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, वन्दना शर्मा, भारती, वेलेनटीना, स्वामी सेवानन्द जी, स्वामी शांतानन्द जी, अशोक माहेश्वरी, अनुराधा गोयल, सतीश गोयल, नन्दकिशेर गोयल, उदय, मुकेश, राकेश, सोनाली सिंह, अंकुश शर्मा, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और परमार्थ निकेतन के सेवकों ने सहभाग किया

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