सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको के महाविलय के फैसले की छात्रों ने की निन्दा

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

दिशा छात्र संगठन की ओर से बैठक करके सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको के महाविलय के फैसले की निन्दा की गयी और सरकार के इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ जन-अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। दिशा छात्र संगठन के अमित ने कहा कि मोदी सरकार का सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंको के महाविलय का फैसला वास्तव में छात्र-युवाओं, कर्मचारियों और आम जनता के हितों पर कुठाराघात करने वाला और पूँजीपतियों के हित में लिया गया फैसला है। सच्चाई यह है कि अपनी नीतियों से पूरी अर्थव्यवस्था को चैपट कर चुकी मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का विलय कर रही है ताकि आर्थिक संकट के दौर में पूँजीपतियों की पूँजी की बढ़ती हुई जरूरत को पूरा करने के लिये आम जनता की खून-पसीने की कमाई खर्च की जा सके। विलय के बाद बड़ी बैलेंस शीट के जरिये पूँजीपतियों को बड़े कर्ज दिये जा सकें। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाएँ बन्द होने का बाद बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती होगी।
पिछले दिनों बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के विलय के बाद लगभग 900 शाखाएँ बन्द हुईं। इन बैंको से इस विलय के बाद करीब ग्यारह हजार कर्मचारी रिटायर हुए हैं जिसकी जगह नये कर्मचारी केवल आठ सौ नये कर्मचारी भर्ती हुए हैं। बैठक में दिशा छात्र संगठन द्वारा सरकार के इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ कर्मचारियों के आन्दोलन का समर्थन करेगा तथा व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। बैठक में विवेक, विकास, महाप्रसाद, अम्बरीश, धर्मराज, नीशू, शिवा, अविनाश, प्रसेन आदि मौजूद रहे।

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