कोटेदार चयन प्रस्ताव को भेजने के एवज में सेक्रेटरी ने मांगे 10 हजार रुपये, जिलाधिकारी से की गई शिकायत

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पर्दाफ़ाश न्यूज़ टीम
सिद्धार्थनगर

योगी सरकार कितना भी प्रयास कर ले कि हम भ्रस्टाचार मुक्त प्रदेश बनायेगे लेकिन, लेकिन ऐसे कर्मचारी के रखते भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनना संभव नही। मामला जनपद के जोगिया ब्लॉक अंतर्गत जोगीबारी का है। शिकायतकर्ता नीरज सिंह पुत्र विनोद सिंह जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को पत्र लिखते हुए कहा कि उसने दिनांक- 31/07/2019 को समय करीब 2•47 बजे दोपहर को अपने मो न०- 7607168340 से अपने ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी श्री उमेश चंद्र पटेल के मो न०- 8423027465 पर फ़ोन किया और कहा कि मेरे ग्राम पंचायत मे जिलाधिकारी महोदय के आदेश के क्रम मे दिनांक- 26/07/2019 को जो खुली बैठक मे कोटदार का प्रस्ताव हुआ है उक्त प्रस्ताव को उपजिलाधिकारी महोदय-शोहरतगढ के कार्यालय मे भेजवा दीजिये तब उन्होने कहा कि प्रस्ताव भेजने के लिये 10,000/- रु० लगेगा और कहे कि जो प्रत्यासी कोटा जीते उन्हे ब्लाक पर रुपया लेकर भेजिये तभी प्रस्ताव भेजेंगे मैने इसका विरोध किया तो फोन काट दिये प्रार्थी ने कुछ देर बाद दुबारा फोन किया और सेक्रेटरी साहब से कहा कि आपने जो दस हजार रुपये मांगा है वो फोन कॉल मैने रिकॉर्ड कर लिया है तो कहने लगे कि ऐसा मत किजीये नही तो मेरी नौकरी चली जायेगी , प्रार्थी ने उक्त भ्रस्टाचार कि शिकायत ब्लाक कार्यालय पर जाकर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) – जोगिया से किया तो उक्त सेक्रेटरी सहाब कहने लगे मैने तो मजाक किया था लेकिन उन्होने एक बार भी यह नही कहा कि दस हजार रुपये कि माँग नही किये है उनसे पूछा गया कि जब प्रस्ताव दिनांक- 26/07/2019 को हुआ तथा समय से प्रस्ताव को जमा करने के निर्देश दिये गये इसके बावजूद आपने दिनांक-31/07/2019 को शिकायत होने से पुर्व प्रस्ताव क्यो नही कार्यालय मे जमा किया तब सेक्रेटरी सहाब कहने लगे कि मैं भुल गया था प्रार्थी ने समस्त बातचीत और घटना का वीडियो अपने मोबाइल मे रिकॉर्ड किया है तथा मेरे साथ अमरनाथ व बहुत से अन्य लोग थे जो घटना के समय मौजूद थे शिकायत के बाद आनन-फानन मे उक्त प्रस्ताव को ब्लाक कार्यालय मे जमा कर दिये परन्तु सेक्रेटरी उमेश चन्द्र पटेल का यह कृत्य दंडनीय अपराध है महोदय से अनुरोध है कि मामले मे प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कठोर कानूनी कारवाही करने की कृपा करें | अब सवाल यह है कि ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ विभाग कौन सी कार्यवाही कब तक करेंगे।

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