पैरों में पड़े छालों से बेखबर थे- सरदार पतविंदर सिंह

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

सरदार पतविंदर सिंह दूसरों के लिए जीना चाहते हैं 13 वर्ष की अल्पायु से लोक कल्याण तथा समाज सेवा से जुड़ा यह शख्स ताजिंदगी  दूसरों के लिए ही गुजारना चाहता है बचपन से ही समाज सेवा करने का व्रत लेने के बाद इस ने पीछे मुड़कर नहीं देखा जनसंख्या नियंत्रण. पर्यावरण संरक्षण. मतदाताओं में जागरूकता .नशे से परहेज. गंगा नदी की स्वच्छता. राजनीतिक में अपराधीकरण रोकने .साइकिल पर सवार होकर चेतना जगाने का प्रयास कर रहा है
1999 में कारगिल में  घुसपैठ के खिलाफ पाकिस्तानी उच्चायोग नई दिल्ली पर समाजसेवी सरदार पतविंदर सिंह ने अपने शरीर पर  पाकिस्तानी विरोधी सूक्ति वाक्य नारे लिखकर पाक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया पैरों में पड़े छालों से बेखबर होकर सिख युवक के देश प्रेम का जज्बा देखकर लोगों ने दाते तले उंगली दबा ली थी वही जज्बा 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी मौजूद है अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्यागने में विश्वास रखते हैं आज भी बराबर आतंकवाद के खिलाफ आवाज को विभिन्न तरीके से उठाते रहते हैंl
बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं समाज में जो दूसरों के लिए जीते हैं जिनका अपना कुछ होता ही नहीं उन्हें तो मात्र एक ही धुन और लगन हुआ करती है कि किस तरह से लोक कल्याण .  समाज सेवा का कार्य उनके   शरीर से होते रहे . वे जीते हैं तो सदैव दूसरों के लिए अपने लिए नहीं ऐसे ही निस्वार्थ समाज सेवी हैं सरदार पतविंदर सिंहl 
सरदार पतविंदर सिंह एक ऐसा नाम है जो जिला प्रयागराज के गुरु नानक नगर. गुरुद्वारा रोड नैनी क्षेत्र में जन्म और पल्ला 13 वर्ष की आयु से ही समाज सेवा के क्षेत्र में उतर कर बरबस सभी को अपनी और आकर्षित कर रहा थाl समाजसेवी पतविंदर सिंह ने कहा कि आज का युवा कुछ- कुट हो गया है उसका दिल निराशा से भर गया है मानव शक्ति का यह धन व्यर्थ जा रहा है क्योंकि उसे कोई मार्ग नहीं मिल रहा है जिसके लिए जीने में मजा आए मरने में गौरव हासिल हो मानव संसाधन हमारी सबसे बड़ी शक्ति है क्योंकि वह कल के भविष्य निर्माता है युवा वर्ग स्वैच्छिक सहयोग से किस्मत बदले इसके लिए युवा वर्ग को प्रेरणा देने वाले पाठ्यक्रम की जरूरत है।

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