शंकरगढ़ रेलवे स्टेशन में पेयजल व बिजली का संकट,यात्री महंगे दामों में खरीद रहे पानी

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

प्रयागराज जनपद के शंकरगढ़ रेल सेवा शुरु होने के साथ ही पहले स्टेशन के रुप मे रेलवे के मानचित्र में शंकरगढ़ क्षेत्र अंकित हुआ था । इस स्टेशन में विभिन्न रूटों के लिए गाड़ियों का स्टापेज है । काफी संख्या में यहां से यात्रियों का आना – जाना लगा रहता है । यात्रियों एवं रेल गाड़ियों के स्टापेज को देखते हुए अप व डाउन में दो स्टेशन की सुविधा दी गई है । विभागीय लापरवाही के चलते दोनों ही स्टेशन में शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है । इतना ही नही स्टेशन में गाड़ियों के रुकने के दौरान यदि कोई यात्री नल से पानी लेना चाहें तो उसे बूंद भर पानी भी नहीं मिल पा रहा है । जबकि दोनों प्लेटफार्म में पीने के लिए नल लगे हुए हैं । इसके बाद भी मुसाफिरों को पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । हर तरफ अव्यवस्था शंकरगढ़ स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करने वाले लोगों को ही नही बल्कि स्टापेज के दौरान यहां पहुंचने वाले यात्रियों को भी महंगे दाम में पानी खरीदना पड़ रहा है । सबसे बड़ी बात यह है कि यहां बिकने वाला पानी कम्पनी का नही बल्कि बोतल बंद मिलता है जिसमें किसी भी तरह की जानकारी मौजूद नहीं रहती है । अगले स्टेशन की दूरी ज्यादा होने की वजह से मजबूरी में लोगों को महंगे दाम में पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है । नल को देखकर पानी पीने और अपने साथ रखी बोतल को भरने के उद्देश्य से यात्री जब ट्रेन से उतरकर टोंटी के पास पहुंचता है तो उसमें से पानी नही निकलता है तो बड़बड़ाता हुआ अपने डिब्बे में चढ़ जाता है । गंभीर पहलू यह है कि वर्तमान समय पर मौसम में ठण्डक है लिहाजा पानी की आवश्यकता का प्रतिशत काफी कम है । बारिश के दौरान पर्याप्त पानी न बरसने से भू – जल स्तर काफी नीचे जा चुका है । ऐसे में आने वाला गर्मी का मौसम इस स्टेशन में पहुंचने वाले यात्रियों के लिए संकट कालीन हो सकता है । प्लेटफार्म में रात ढलते ही छा जाता है अंधेरा शंकरगढ़ स्टेशन में जहां दोनों तरफ नल होने के बाद भी यात्रियों को बूंद – बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ बिजली का हाल भी बेहाल है । बताया जा रहा है कि प्लेटफार्म में लगभग तीन दर्जन से भी अधिक बिजली के खम्भे लगे हुए है , जिनमे मात्र कुछ ही खम्भों में बल्व जलते दिखाई देते है बाकी खम्भों के बल्व या तो बिगड़े हुए हैं या फिर उन्हें बदलने की जहमत विभाग नही उठा रहा है । लिहाजा पूरे स्टेशन परिसर में अंधेरा छाया रहता है । यहां से गुजरने वाले यात्रियों का कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार स्टेशन प्रबंधक को अवगत कराया जा चुका है । इतना ही नही स्टेशन के पीछे वाली सड़क में भी अंधेरा छाया रहता है । जिसकी वजह से अपराधियों को मौका मिल जाता है । शंकरगढ़ वासियों का कहना है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति रात में इस स्टेशन में उतर जाए तो उसके साथ क्या होगा यह कहा नहीं जा सकता ।

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