अटेवा-पेंशन बचाओ मंच के तत्वाधान में संगम नगरी प्रयागराज में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

अटेवा-पेंशन बचाओ मंच के तत्वाधान में संगम नगरी प्रयागराज में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह चिन्तन शिविर पटेल संस्थान अलोपीबाग प्रयागराज के प्रांगण में सम्पन्न होना है। पुरानी पेंशन बहाली हेतु आने वाले समय में आंदोलन की रूप रेखा तय करने और पेंशन के महत्व एवं सामाजिक सुरक्षा की महत्ता जानने के लिए इस चिन्तन शिविर का आयोजन किया गया है।
चिंतन शिविर के प्रथम दिवस के मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश मा. सभाजीत सिंह जी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ महेन्द्र सिंह जी प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश एजुकेशनल ऑफिसर्स एसोसिएशन, एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय कुमार ‘बन्धु’ ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों (मुख्य एवं विशिष्ट) के द्वारा पौधों को जल देकर किया गया, जल देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कार्यक्रम प्रारंभ करने की नई परिपाटी को जन्म दिया। पूँछने पर बताया कि जिस प्रकार पेड़ हमारे जीवन मे सहायक होते हैं उसी प्रकार पेंशन भी हमारे बुढ़ापे की सहायक है, और आज पौधों को जल देकर हम बुढापे के लिए लाठी तैयार कर रहे हैं, साथ ही चिंतन शिविर के माध्यम से पुरानी पेंशन रूपी लाठी लेने का संकल्प लिया। जिससे हमारा बुढापा आत्मसम्मान के साथ सर उठाकर बीत सके। अटेवा स्वर कोकिला सुमन कुरील जी ने साथियों के साथ स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों और आगंतुकों का स्वागत किया।
आज के शिविर के प्रथम सत्र का विषय रहा- राष्ट्र निर्माण में शिक्षक कर्मचारियों की भूमिका एवं उनकी सामाजिक सुरक्षा
कई प्रमुख वक्ताओं ने उक्त विषय पर अपने वक्तव्य दिये। कमोबेश सभी वक्ताओं का यही मानना था कि कोई भी देश यदि प्रगति करता है तो निश्चित ही वहां के शिक्षक और कर्मचारियों की महती भूमिका होती है।
मुख्य अतिथि पूर्व न्यायमूर्ति मा. सभाजीत जी ने कहा की पेंशन सामाजिक सुरक्षा है और लोकतान्त्रिक देश मे यह अत्यंत आवश्यक है। संविधान में भी पेंशन को अधिकार बताया गया है। उच्चतम न्यायालय ने भी इसे कर्मचारियों का अधिकार बताया है।
विशिष्ट अतिथि डॉ महेन्द्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश एजुकेशनल एसोसिएशन ने कहा कर्मचारी शिक्षक देश के निर्माण की रीढ़ है। सरकारे आती हैं जाती हैं वह अपने हिसाब से नीति बनाती है इस तरह से कोई व्यवस्था स्थाई नहीं होती है। लेकिन शिक्षक कर्मचारी स्थायी होता है और लगातार राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देता है। इसलिए उसकी सामाजिक सुरक्षा अवश्य होना चाहिए।
NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने कहा कि शिक्षक अगर देश के लिए मष्तिष्क तैयार करता है जो देश के नवनिर्माण के लिए नीति तैयार करता है। वहीं कर्मचारी भौतिक प्रगति का सहभागी होता है और नीतियों को अमली जामा पहनाता है। संसद यदि देश की प्रगति और विकास के लिए कानून बनाती है तो उस कानून का पालन करवाना और उसे लागू कर धरातल पर उतारने का जिम्मा कर्मचारियों के कंधे पर होता है।
उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बुढापे में शिक्षकों और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन होती है जिसे हमें किसी भी कीमत पर वापस पाना है।
सांस्कृतिक प्रकोष्ठ प्रभारी धर्मेंद्र गोयन जी ने ये भीख नही है कोई अधिकार है हमारा, लेंगे पुरानी पेंशन है अटेवा का ये नारा…. प्रस्तुत कर सभी को प्रेरित किया।
प्रथम सत्र का समापन अटेवा स्मारिका का विमोचन कर हुआ। अटेवा ने अपने संघर्षों की दास्तान और आंदोलन के अनुभव के साथ नयी ऊंचाइयों तक ले जाने की रूपरेखा स्मारिका के माध्यम से प्रस्तुत की। स्मारिका का विमोचन NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अटेवा प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय कुमार ‘बन्धु’ सहित समस्त प्रदेश पदाधिकारियों एवं संपादक मण्डल की’ उपस्थिति में मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश मा. सभाजीत सिंह जी, विशिष्ट अतिथि श्री महेंद्र सिंह जी (प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश एजुकेशनल एसोसिएशन) ने किया।

प्रथम दिन के दूसरा सत्र ओपन सत्र रहा जिसका विषय था- *पुरानी पेंशन-भविष्य की चुनौतियाँ और आंदोलन का स्वरूप व  रूपरेखा* इस विषय पर प्रतिभागियों से राय ली गयी जिस पर विभिन्न साथियों के द्वारा विचार व्यक्त किया। साथ ही बदलते परिवेश में आंदोलन की दिशा एवं दशा क्या होगी इस पर भी विचार विमर्श किया गया। प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों से आये प्रतिभागियों ने अपने बहुमूल्य विचार दिए जिससे आंदोलन को बढ़ाया जा सके, साथ ही एक सुर में सभी ने पुरानी पेंशन बहाली तक आन्दोलनरत रहने का संकल्प लिया।

मंच संचालन अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉ नीरजपति त्रिपाठी ने किया। शिविर में प्रमुख रूप से सत्येंद्र राय, चंद्रहास सिंह, विक्रमादित्य मौर्य, उपेंद्र वर्मा, संजय उपाध्याय, श्रवण कुशवाहा, विजय प्रताप यादव, डॉ रमेश चंद्र त्रिपाठी, कुलदीप सैनी कुली, राकेश रमन, डॉ हरि प्रकाश यादव,डॉ निर्भय गुर्जर, विजेंद्र वर्मा, संदीप वर्मा, सुफियान अहमद अरुण कुमार सिंह हूण, रजत यादव, सुरेन्द्र पाल, डॉ सैय्यद अब्बास, सुधीर गुप्ता सुरेश यादव, कमल सिंह, नीलम सिंह अरुण कुमार नरेंद्र बहादुर सिंह अमृतलाल गुप्ता पुष्प लता सिंह अंजना सिंह अंजना दास गिरीश तिवारी अशोक कुमार सिंह अजय विश्वकर्मा आशीष कुमार गुप्ता सचिन रावत अशोक कुमार कनौजिया सैय्यद दानिश इमरान तेज बहादुर सिंह अनुराग पांडे राधेश विकास सुनील शर्मा दिनेश कुमार यादव सुरेश यादव श्याम सिंह राम कैलाश यादव अमर बहादुर सिंह धर्मजीत यादव रोहित सोनकर जितेंद्र कुमार संदीप कुशवाहा मिथलेश मौर्य अरुण कुमार पटेल आदि लोग मौजूद रहे।

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