पूज्य संतों ने बद्रीनाथ धाम में ध्यान कर मनाया अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, महोत्सव के अवसर पर बद्रीनाथ धाम से योगमय जीवन जीने का दिया संदेश

0
515

आर के पाण्डेय की विशेष रिपोर्ट
ऋषिकेश

अध्यात्म जगत के शिखरस्थ पूज्य संतों ने आज अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बद्रीनाथ धाम में ध्यान कर योग दिवस मनाया। उत्तराखण्ड की राज्यपाल महामहिम श्रीमती बेबी रानी मौर्या जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, प्रसिद्ध कथाकार संत श्री रमेश भाई ओझा जी (भाईश्री) और पतजंलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण जी ने अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अवसर पर बद्रीनाथ धाम में ध्यान कर योगमय जीवन जीने का संदेश दिया।
महामहिम श्रीमती बेबी रानी मौर्या जी ने कहा कि ’विश्व को भारत की ओर से प्रदान की अनुपम भेंट है योग। आज पूरा विश्व योग की ओर आकर्षित हो रहा है और योग के महत्व को पहचान रहा है यह हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ही के अथक प्रयासों का परिणाम है। उन्होने देशवासियों का आह्वान करते हुये कहा कि हमारी योग रूपी दिव्य परम्परा को अपनाये और स्वस्थ जीवन जियें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत की अद्भुत योग रूपी अनुपम देन को विश्व के अनेक देशों तक पहुंचाया है। ऋषियों की अनेक वर्षों की तपस्या से निष्पादित योग रूपी धरोहर को वैश्विक पहचान दी है वास्तव में यह भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की अद्भुत सेवा है। लोग योग करेंगे तो सुखी रहेंगे; स्वस्थ रहेंगे; आनन्दमय रहेंगे और शान्तमय जीवन जीयेंगे। यह भारत के लिये गौरव का विषय है, साथ ही योग को अपनाकर अनेक लोगों के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन आया है वह विलक्षण है। पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने योग को सर्वसुलभ बनाकर ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होने योग हो हर घर और हर व्यक्ति तक पहुंचा दिया ’’ स्वामी जी ने कहा कि ’योग के माध्यम से हम तनाव, मानसिक और शारीरिक व्याधियों को शमन तो करते है साथ ही योग के माध्यम से हम स्व के साथ परमतत्व को प्राप्त कर सकते है। योग में वह शक्ति है जिससे ’विश्व को एक परिवार’ बनाया जा सकता है। योग के माध्यम से समरसता, समग्रता, समानता आदि मूल्यों की स्थापना की जा सकती है। उन्होेने योग दिवस पर संदेश देते हुये कहा कि योग की गंगा हर दिल में सतत प्रवाहित होती रहे।’
संत श्री रमेश भाई ओझा जी ने कहा कि ’कथा चरित्र और विचारों को शुद्ध करती है और योग, तन और मन की व्याधियों का शमन कर जीवन को शुद्ध करता है। उन्होने कहा कि जिस प्रकार हमें तन की शद्धि के लिये स्नान करना पड़ता है उसी प्रकार शरीर और मन की समग्र शुद्धि के लिये हमें योग और ध्यान करने की नितांत आवश्यकता होती है।’
आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि ’’जो मनुष्य अपने आप को योग की अग्नि में तपा लेता है उसे कोई रोग और भय नहीं सताता है। योग, समग्र जीवन पद्धति है। आसन, ध्यान, प्राणायाम तो केवल योग की विधायें है। उन्होने कहा कि जीवन में हम जो भी क्रियायें सुव्यवस्थित तरीक से करते वह योग है।’’ सभी पूज्य संतों ने बद्रीनाथ धाम में योग और ध्यान कर योग को आत्मसात करने का संदेश दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here