अधिवक्ता हत्या केस- दस साल तक एक ही आफिस में काम किया फिर क्या हुआ ले ली जान

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आर के पाण्डेय की कलम से
प्रयागराज

आज समाज व राज्य तथा न्यायपालिका के समक्ष विचारणीय है कि आखिर दस साल तक एक ही ऑफिस में साथ साथ काम व बार कौंसिल के चुनाव में कदम से कदम मिलाकर साथ देना एवं दिन रात एक कर प्रचार करना लेकिन फिर अचानक क्‍या हुआ ऐसा कि साथी अधिवक्‍ता ही जान का दुश्‍मन बन गया। दीवानी परिसर आगरा में हुए अधिवक्ता हत्‍याकांड के बाद हर किसी की जुबान पर यही एक सवाल है। बता दें कि बुधवार दोपहर दीवानी परिसर आगरा में उप्र बार कौंसिल की अध्‍यक्ष कुमार दरबेश की हत्‍या उनके साथी अधिवक्‍ता मनीष शर्मा ने कर दी। घटना से कुछ देर पूर्व ही उप्र बार कौंसिल की नवनिर्वाचित अध्‍यक्ष का दीवानी परिसर आगरा में भव्य स्‍वागत समारोह हुआ था। इसके बाद वे अधिवक्‍ता अरविंद मिश्रा के चैंबर में आकर बैठ गईं थीं। तभी साथी अधिवक्‍ता मनीष शर्मा चैंबर में दाखिल हुए और आनन फानन में दरबेश पर एक के बाद एक तीन गोलियां मार दीं। इसके बाद दो गोलियां मनीष ने खुद के शरीर में भी उतार दीं। गोली की आवाज से दीवानी परिसर में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंची पुलिस दरबेश को पुष्‍पांजलि हास्पिटल और मनीष को रेनबो हॉस्पिटल लेकर पहुंची। दरबेश को डॉक्‍टरों ने कुछ ही देर में मृत घोषित कर दिया जबकि मनीष की हालात लगातार बिगड़ने के कारण उन्‍हें मेदांता ले जाया जा रहा है। मनीष के सिर में गोली लगी है।

जब गोलियाें की आवाज से थर्राई दीवानी

घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि कोई कुछ समझ नहीं पाया। दीवानी परिसर में मौजूद अन्‍य अधिवक्‍ताओं के अनुसार दरबेश और मनीष शर्मा 2009 से साथ- साथ काम कर रहे थे। दोनों एक ही चैंबर में बैठते थे। दरबेश ने जब बार कौंसिल का चुनाव लड़ा तो कदम से कदम मिलाकर मनीष ने प्रचार भी किया लेकिन आज अचानक क्‍या हुआ ऐसा कि वो उनकी जान का दुश्‍मन ही बन गया। कुछ लोगों के अनुसार दरबेश और मनीष की चुनाव बाद से खटपट चल रही थी। कुछ लोग इसी खटपट को हत्‍या की मुख्‍य वजह बता रहे हैं।

दो दिन की अध्‍यक्ष ही बन पाईं दरबेश

दो दिन पहले ही दरबेश यादव उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। यूपी बार काउंसिल के इतिहास में वे पहली महिला अध्यक्ष बनी थीं। यूपी बार कौंसिल का चुनाव रविवार को प्रयागराज में हुआ था। दरबेश सिंह और हरिशंकर सिंह को बराबर 12-12 वोट मिले थे। दरवेश सिंह के नाम एक रिकॉर्ड यह भी है कि बार काउंसिल के 24 सदस्यों में वे अकेली महिला थीं।

दरबेश सिंह मूल रूप से एटा की रहने वाली थीं। 2016 में वे बार काउंसिल की उपाध्यक्ष और 2017 में कार्यकारी अध्यक्ष बनी थीं। वे पहली बार 2012 में सदस्य पद पर विजयी हुई थीं। तभी से बार कौंसिल में सक्रिय रहीं। उन्होंने आगरा कॉलेज से विधि स्नातक की डिग्री हासिल की। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (आगरा विश्वविद्यालय) से एलएलएम किया। उन्होंने 2004 में वकालत शुरू की। दरबेश के पिता सेवानिवृत क्षेत्राधिकारी यूपी पुलिस हैं। दरबेश सहित वे चार भाई बहन थे। जिसमें बहन कंचन दारोगा है, छोटी बहन रेशमा अभी पढ़ रही है और सनी दरबेश के साथ ही रहता था।।

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