गंगा दशहरा : इस वर्ष 12 जून 2019, बुधवार को मनाया जाएगा गंगा दशहरा, पहले गंगा दशहरा प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता रहा

0
381

आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

स्कंदपुराण के अनुसार गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी पर जाकर स्नान, ध्यान तथा दान करना चाहिए. इससे वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है. यदि कोई मनुष्य पवित्र नदी तक नहीं जा पाता तब
वह अपने घर पास की किसी नदी पर स्नान करें।

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को संवत्सर का मुख कहा गया है इसलिए इस इस दिन दान और स्नान का ही अत्यधिक महत्व है। वराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, बुधवार के दिन, हस्त नक्षत्र में गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थी। इस पवित्र नदी में स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट होते है।

गंगा दशहरे का महत्व
भगीरथी की तपस्या के बाद
जब गंगा माता धरती पर आती हैं उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी थी. गंगा माता के धरती पर अवतरण
के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से पूजा जाना
जाने लगा. इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर जो
गंगा स्तोत्र पढ़ता है वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है. स्कंद पुराण में दशहरा नाम का गंगा स्तोत्र दिया हुआ है।
यह स्तोत्र गत वर्ष मे बताया गया था।

गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालु जन जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए. ऎसा करने से शुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है।

गंगा दशहरे का फल | ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन
गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों
का नाश होता है. इन दस पापों में तीन पाप कायिक,
चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक होते हैं.
इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है।

इस दिन पवित्र नदी गंगा जी में स्नान किया जाता है। यदि कोई मनुष्य वहाँ तक जाने में असमर्थ है तब अपने घर के पास किसी नदी या तालाब में गंगा मैया का ध्यान करते हुए स्नान कर सकता है. गंगा जी का ध्यान करते हुए षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए।

गंगा जी का पूजन करते हुए निम्न मंत्र पढ़ना चाहिए :-

“ऊँ नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here