बिजली कटौती से नैनीवासी हो रहें हैं परेशान, बिजली विभाग के अधिकारियों के प्रति आक्रोश

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आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
नैनी, प्रयागराज

इन दिनों चिलचिलाती गर्मी से बेहाल लोगों में बिजली विभाग के अधिकारियों के प्रति जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। गुरुवार को भी पारेर-हार्ट से जुड़े चकरघुनाथ के कई मुहल्ले की बिजली सुबह लगभग 10 बजे से ही गुल रही। वहीं दो बजे तक बिजली गुल रहने के बाद बिजली आयी भी तो एक फेश दिया गया जबकि दूसरा फेश गुल ही रहा। लगभग एक बजे के आस – पास में बिजली के कई उपभोक्ताओं ने पारेर – हार्ट कार्यालय के कर्मचारियों को कॉल भी किया । जिसके बाद भी कर्मचारी उपभोक्ताओं को इधर उधर की बात बता कर टहलाते रहें। उसी बीच जब पत्रकार द्वारा बिजली कटौती का कारण पूंछा गया तो पारेर – हार्ट में मौजूद कर्मचारी ने किसी भी तरह का कोई भी फॉल्ट न होने की बात बताई। वहीं दस बजे के आस पास से की गई कटौती को दावा करते हुए बताया कि बिजली आपूर्ति सुबह से ही है , दोपहर दो बजे के बाद से एक फेश बिजली कटने के बाद से उसे जोड़ने की बात बताई गई। जबकि उपभोक्ताओं की माने तो बिजली कर्मचारियों से लेकर अधिकारी तक सिर्फ झूठ का ही साहारा लेते हुए अपने दिनचर्या की खाना-पूर्ति मात्र कर अपना सिस्टम बना कर आराम से घर चले जाते हैं। यदि शाम पांच बजे के बाद से यदि किसी तरह का कोई फॉल्ट आया भी तो वह संविदाकर्मियों के भरोसे टिका होता है , जिसके उपरान्त में उनको पैसा देकर मुहल्लों में बुलाना पड़ता है , यदि बिजली सुधारने के एवज में उन्हें कुछ नहीं दिया गया तो वह उस मुहल्ले की ओर झाँकते भी नहीं बिना अधिकारियों के आदेश के क्योंकि अब अधिकारी शाम पांच बजे के बाद से अपने घर को चले जाते हैं , फिर अगली मुलाकात दूसरे दिन सुबह दस व ग्यारह बजे के पहले हो ही नहीं सकता। यही आलम नैनी से जुड़े सभी पॉवर हॉउस के कर्मचारियों व अधिकारियों का है , वह चाहे जेल रोड पॉवर हाऊस हो या टीएसएल पॉवर हाऊस , आदि ऐसी ही समस्याएं सभी पॉवर हॉउस में बनी हुई है। चौबीस घंटों में घंटो – घंटों तक बिजली कटौती के बाद बात करने पर गर्मी के कारण लोड बहुत ज्यादा है कहते हुए बिना समस्या के ही बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है। जबकि बिजली कर्मियों के इस तरह के व्यवहार से उमस भरी गर्मी में लोगों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त रहता है। वहीं लोगों में यह चर्चाएं बनी होती हैं कि लाखों रुपये वेतन उठाने वाले अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल करने में तनिक भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। साथ ही इनका अपना जो ऊपरी सिस्टम बंधा होता है वह सरकारी हिंसाब के परे ही है।

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