विस्फोटक जनसंख्या वृद्धि समस्या व निराकरण, कारण व निदान- अधिवक्ता आर के पाण्डेय की कलम से

0
573

आर के पाण्डेय की रिपोर्ट
प्रयागराज

भारत वर्ष में विगत कुछ दशकों के जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि से विस्फोटक स्थिति उतपन्न हो गई है। यह देखा जा रहा है इस विस्फोटक जनसंख्या वृद्धि के तरफ न तो सरकार का ध्यान है व न ही सामाजिक संस्थाओं का। आम नागरिक अपने रोजमर्रा की जिंदगी में भौतिक संसाधन जुटाने व राजनैतिक दल तथा सरकारें चुनावी दृष्टिकोण से अपने वोट बैंक की व्यवस्था में इतनी मशगूल हैं कि उन्हें इस तरफ सोचने की भी फुर्सत नही है जबकि यह बेतहासा जनसंख्या वृद्धि राष्ट्र के विकास में बाधक बन रही है।

भारत वर्ष में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिराजी के शासन काल मे दो हम दो हमारे का नारा चलाया गया जिसका काफी सकारात्मक परिणाम भी रहा परन्तु अपरोक्ष रूप से यह नारा केवल हिंदुओं पर ही थोपा गया जबकि अन्य मजहब के लोगों को अल्पसंख्यक के नाम पर जनसंख्या वृद्धि की खुली मौखिक आजादी मिली रही वही भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत एक जीवन साथी के जिंदा रहते दूसरी शादी कानूनन जुर्म बना है परन्तु यह कानून भी सिर्फ हिंदुओं पर ही बाध्यकारी है जबकि मुस्लिम पर्सनल लॉ, मुस्लिम विधि व अल्पसंख्यक के नाम की राजनीति ने मुस्लिम समाज को जनसंख्या वृद्धि में खुली छूट दे रखी है। शिक्षा के अभाव में हिन्दू समाज का एक बड़ा अशिक्षित समाज आज भी अनेकों बच्चों को ईश्वर की देन के नाम पर जन्म देकर तो मुस्लिम समाज तो धर्म की आड़ में चार वैध व पांचवा अनगिनत मुताह विवाह करके तथा परिवार नियोजन से दूर रहकर अनेकों बच्चे पैदा करके बेतहासा जनसंख्या वृद्धि का कारक बना हुआ है व देश मे जनसंख्या के आसमान वितरण का भी परिचायक है जिसके परिणाम स्वरूप हिन्दुओ के नाम पर बने हिन्दुस्तान रूपी भारत मे आठ राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो गया है एवं रोहिंग्या जैसे अवैध घुसपैठियों के कारण भी जनसंख्या वृद्धि चरम पर पहुंची है।
प्रायः देखा गया है कि एक से अधिक शादी व दो से अधिक बच्चों वाले अधिकांश परिवार अपने परिवार के भरण पोषण में ही व्यस्त रहने के कारण जहां एक तरफ राष्ट्रहित में योगदान देने में पीछे रहते है वही यही परिवार अधिकांश सरकारी योजनाओं का सीधे लाभ उठाकर नकारात्मक रूप से स्वयं भी विकास में पीछे रह जाता है जोकि चिंता का विषय है।
आज समय की मांग के अनुसार जरूरत है कि सभी राजनैतिक दल, सरकार, सामाजिक संस्थाएं व प्रबुद्ध नागरिक एक सार्वभौमिक मुहिम चलाकर इस विस्फोटक जनसंख्या वृद्धि को रोकने में राष्ट्रहित में अपना योगदान दें अन्यथा अगले दस साल में संसाधनों की कमी के चलते हम एक भयावह स्थिति से गुजर सकते हैं। प्रबुद्ध नागरिक इस विषय पर लोगों को जागरूक कर सकते है तो सामाजिक संस्थाए इस विषय पर जन जागरण अभियान चला सकती हैं वही विभिन्न राजनैतिक दल व सरकार वोट बैंक से ऊपर उठकर सम्पूर्ण भारतीय समाज के लिए एक विधान की व्यवस्था एक समान रूप से सभी धर्म के लोगों पर लागू करे जिसमे आई0पी0सी0 की धारा 494, एक विवाह, अधिकतम दो बच्चों की ही व्यवस्था व परिवार नियोजन बिना भेदभाव के हिन्दू व मुस्लिम आदि सभी धर्मावलम्बियों पर समान रूप से लागू किया जाए जिसके लिए भारत सरकार को समान नागरिक संहिता भी लागू करना ही होगा। हमारी सरकार को यह नियम भी कड़ाई से लागू करना चाहिए कि एक से अधिक विवाह व दो से अधिक बच्चों वाले परिवार को सभी प्रकार की सरकारी योजनाओं से पूर्णतया वंचित किया जाए तथा उन्हें किसी भी प्रकार के चुनाव लड़ने से भी प्रतिबंधित कर दिया जाए। इसके साथ ही भारत सरकार अब तत्काल बिना किसी भेदभाव के रोहिंग्या सहित सभी विदेशी शरणार्थियों को देश से बाहर निकाले तथा बिना वीजा के किसी भी विदेशी के देश मे आने को प्रतिबंधित करे। विचारणीय है कि देश के सीमित संसाधन पर ही सही विकास के लिए सीमित जनसँख्या का सिद्धांत अपनाना आवश्यक है जिसके लिए हर हाल में हमे बेतहासा विस्फोटक जनसँख्या वृद्धि को रोकना ही पड़ेगा भले ही राष्ट्रहित में हमे किसी भी प्रकार की सार्वभौमिक योजना बनाकर उसे लागू करना पड़े।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here