समेकित बाल विकास पुष्टाहार में भ्रष्टाचार का बोलबाला

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आर. के. पाण्डेय
बस्ती

बस्ती जनपद के समेकित बाल विकास पुष्टाहार विभाग में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है जिसमे मनमानी नियुक्तियां व सुपरवाइजर के जरिये सुविधाशुल्क का वसूला जाना भी सम्मिलित है। जानकारी के अनुसार समेकित बाल विकास पुष्टाहार विभाग जिसे जनसामान्य प्रायः आंगनबाड़ी विभाग भी कहते हैं। पता चला है कि इस विभाग के बस्ती जनपद में व्यापक स्तर पर भृष्टाचार व्याप्त है जिसमे मनमानी नियुक्ति व सुपरवाइजर के जरिये सुविधाशुल्क की वसूली तक सम्मिलित है। बस्ती जिला के विक्रमजोत ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद रामनगर पर वर्षों पूर्व सुमनलता पाण्डेय की नियुक्ति बतौर आंगनबाड़ी कार्यकत्री की गई थी जोकि कि कागज पर आज भी अनवरत कार्यरत है। व्यवस्था के अनुसार नियुक्ति के लिए सम्बंधित ग्राम पंचायत का निवासी होना अनिवार्य है जिसमे अन्य तमाम शर्तो के साथ विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता आदि को वरीयता देना व्यवहारिक है। बता दें कि सुमनलता पाण्डेय अपनी नियुक्ति के समय शादीशुदा होने के कारण ससुराल में रहती थी तथा उसका अपने पति से तलाक तक नही हुआ था परंतु उसके ग्राम प्रधान माता-पिता ने अपने पद का दुरुपयोग करके विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से उसका मायके के सेंटर पर ही नियुक्ति करा लिया व लाभ लेने लगे। आज भी सुमनलता पाण्डेय अपने सेंटर के क्षेत्र में न रहकर अयोध्या में रहती है। उसने एक पति के जिंदा रहते दूसरी अवैध शादी कर ली थी जिससे उसके बच्चे भी हैं वही उसका अपने पहले पति से आज भी कई मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन है। रोचक बात यह है कि सभी तथ्यों को छिपाकर गलत तरीके से मनमानी नियुक्ति का लाभ उसे दिया गया है। उपरोक्त की लिखित शिकायत लम्बे समय से सम्बंधित अधिकारियों के पास लम्बित है। इसी प्रकार इस जिले में कई नियुक्तियां की गई है।वहीं दूसरी तरफ जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से सुपरवाइजर के जरिये सुविधाशुल्क के नाम पर प्रति माह अवैध वसूली भी हो रही है जिसमे मासिक प्रगति रिपोर्ट आदि का रुपये पांच प्रति फॉर्म, रु0 दो प्रति बच्चा फीडिंग चार्ज, गोदभराई आदि के सुविधाशुल्क में से आधा रूपया सुपरवाइजर को देना शामिल है। इस संदर्भ में एनडी न्यूज द्वारा सम्पर्क किये जाने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय से सन्तोषजनक जवाब नही मिला जबकि सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय/त्रिपाठी ने मामले में पूरी जानकारी करके बात करने को कहा है वही सुपरवाइजर कुमुद सिंह ने बताया कि विभाग में कम्प्यूटर आपरेटर की नियुक्ति न होने व विक्रमजोत में महंगा सिस्टम होने के कारण उन्हें लगभग चालीस किमी दूर बस्ती शहर में जाकर प्राइवेट कम्प्यूटर पर सुविधाशुल्क देकर फीडिंग करानी पड़ती है इसीलिए सुविधाशुल्क देना पड़ता है वहीं कुमुद सिंह सुपरवाइजर से जब यह पूछा गया कि फीडिंग चार्ज के बिल बाउचर के जरिये किस मद में सुविधाशुल्क का लेन-देन होता है तो वह निरुत्तर रहीं परन्तु उन्होंने बताया कि तमाम आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की नियुक्ति मनमानी व गलत हुई है जिनमे से अधिकांश ग्रेजुएट होने के बावजूद न तो काम कर पाती है व न ही कोई कागजात तैयार कर पाती है परंतु येन-केन-प्रकारेण उनका कागज तो पूरा कराना ही पड़ता है जिसके लिए खर्च की जरूरत पड़ती है। कुमुद सिंह का यहां तक कहना है कि कुछ प्रमोटेड सुपरवाइजर तो ठीक से हस्ताक्षर तक नही बना पाती हैं। इसी प्रकार सुमनलता पाण्डेय आंगनबाड़ी कार्यकत्री के शिकायत व आरटीआई के बावत जानकारी सम्बन्धी सवाल पर जिला कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय ने बताया है कि इस संदर्भ में सीडीपीओ लक्ष्मी से लिखित रिपोर्ट मांगी गई है जबकि सुपरवाइजर कुमुद सिंह ने बताया है कि इस बावत लिखित जवाब के लिए सुमनलता पाण्डेय को पत्र रिसीव कराया गया है व जल्द जवाब भेजा जाएगी वहीं बेहद हास्यास्पद यह है कि सुपरवाइजर की उच्च अधिकारी सीडीपीओ लक्ष्मी पाण्डेय/त्रिपाठी ने किसी भी शिकायत व पत्र से ही इनकार कर दिया जिसके बावत कार्यालय के लोगो ने गोपनीयता की शर्त पर बताया है कि सीडीपीओ लक्ष्मीजी अयोध्या में ही रहती है व सुमनलता पाण्डेय की करीबी होने के कारण तथा कार्यालय में समय न दे पाने के कारण मामले से अनभिज्ञता दिखाकर सुमनलता पाण्डेय का बचाव कर रही हैं। विभागीय भ्र्ष्टाचार व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के उत्पीड़न के बावत बस्ती जिला के तमाम आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से बात करने पर अधिकांश ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया है कि सुपरवाइजर कुमुद सिंह द्वारा व्यक्तिगत व बैठकों में सार्वजनिक तौर पर सुविधाशुल्क की मांग की जाती है जिसे देना ही पड़ता है अन्यथा उनके द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का जबरन उत्पीड़न किया जाता है। फिलहाल इस विभाग के मनमानी नियुक्तियों व भ्र्ष्टाचार की उच्च स्तरीय गोपनीय जांच कार्यवाही जनहितकारी है अन्यथा विभागीय उद्देश्य केवल कागजी मसाला बना रहेगा।

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